नोएडा समाज जागरण
नोएडा ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में भ्रष्टाचार को लेकर लगातार गहमागहमी चलते रहते है। एक तरफ जहाँ तीनों प्राधिकरण में बड़े पैमाने पर जमीन घोटाले का आरोप लग रहे है वही दूसरी तरफ सरकारें जड़ उखाड़ने के बजाय पत्ते और डाल को कांट छांट कर ही बेदाग बनाने को कोशिश करती रही है। कार्यवाही के नाम पर एक दो फोर्थ ग्रेड के कर्मचारियों के नाम ले लिए जाते है और मामले को शांत कर दिए जाते है। देश के सर्वोच्चय न्यायालय के टिप्पणि के बाद सरकार में थोड़ा हड़बड़ाहट तो थी लेकिन वह भी जांच कराकर शांत निद्रासन में विश्राम मुद्रा में बैठ गई। सरकार के द्वारा कराई गई जांच में शायद कोई कमी नही मिली या फिर सरकार मे उस कमी का ईलाज करने योग्य वैध नही है।
नोएडा के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता श्री अनिल के गर्ग इस मामले में काफि सक्रिय पहल करते हुए कई बार सरकार को पत्र लिख चुके है कि तीनों प्राधिकरण में फैले भ्रष्टाचार का ईलाज बार-बार दांतों में मशाले को भरने से नही होगा बल्कि इसके लिए रूट में जाकर ही या तो दांतों को उखाड़ने की जरुरत है या फिर उसकों उसके अपने समुह से अलग करने की। कारण जो भी नया भी लोग आयेंगे तो उनके संपर्क में आकर भ्रष्ट बनते जायेंगे। इसलिए जरूरी है कि रूट नाल करें और उनके नसों को अलग करें। जो भी आदतन भ्रष्ट है उनको समय से पहले ही रिटायरमेंट देकर उनके संपति की जांच होनी चाहिए। सिर्फ उनके ही नही उनसे जुड़े सभी लोगों की। अक्सर देखा गया है कि लोग भ्रष्ट कमाई करके अपने नौकरों के नाम भी करोड़ों के संपति खरीद लेते है।
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंदगोपाल गुप्ता की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक । जिसमें यमुना आर्थारिटी में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई। बाद में मिडिया से वार्ता करते हुए श्री नंदी नें कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरों टालरेंस की नीति पर चल रही है। प्रदेश के सभी प्राधिकरणो में दागी अफसरों को वीआरएस देने की तैयारी है। जिन अफसरों को कभी सस्पेंड किया गया हो या फिर उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच हुई हो उनकों स्वेच्छा से सेवानिवृति देने के लिए भी स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई है। इसके साथ ही सभी प्राधिकरणों से दागी कर्मचारियों की सूची मांगी गयी है।
लेकिन सवाल फिर वही उठता है कि स्क्रीनिंग कौन करेगा ? क्या अब भी सरकार को लगता है कि आफिस में काम करने वाले चपरासी और कलर्क मिलकर नोएडा ग्रेटर नोएडा में 54 हजार करोड़ की भूमि घोटाला को अंजाम दे दिया। तो निश्चित ही यह कर्मचारी योग्य थे और इनके ऊपर बैठे लोग अयोग्य। क्या टवीन टावर जो कि 24 मंजिल के बजाय 40 मंजिल बन गए और वह भी एक की जगह दो-दो यह निगरानी करने का काम किसी चपरासी ग्रेड के कर्मचारियों का था ? सबसे बड़ी बात सन 2002 से 2017 तक की करायी गयी आडिट रिपोर्ट को सरकार सार्वजनिक क्यों नही करना चाहती है ?
टवीन टावर में लापरवाही प्राधिकरण और उनके कर्मचारी के गलतियों का खामियाजा उन 600 घर खरीदार इनवेस्टर्स को भूगतना पड़ रहा है। करोड़ों के इन्वेस्टमेंट के बाद भी उनका हाथ खाली है और उम्मीद है कि 10 साल और उनको इंतजार करना पड़ेगा या फिर दूसरे प्रोजेक्ट में उनको मजबूरी में शिफ्ट होना पड़ेगा। मौलिक भारत के द्वारा आयोजित एक बैठक में घर खरीदार ने बेबाकी यह कहा कि अब न्याय तो ऊपर ही मिलेगा और घर भी ऊपर ही मिलेगा। कुछ लोग स्वर्ग सिधार चुके है और कुछ लोग जल्द ही सिधार जायेंगे।
नोएडा में स्पोर्ट सिटी बनाने के लिए बिल्डर को जमीन दिया गया इस शर्त के साथ कि वहाँ पर 70% में खेल परिसर बनाये जायेंगे और 30 % प्रतिशत में आवासीय। लेकिन बिल्डर नें आवासीय तो बना लिया लेकिन खेल के मैदान को खाली छोड़ दिया झाकने के लिए। बड़ी हैरानी की बात है कि इतने समय में किसी ने सवाल तक नही किया कि आवासीय बनाने से पहले खेल के मैदान बनाने थे जिस पर 400 करोड़ की खर्च करना था उसका क्या हुआ ? क्या इसके लिए जिम्मेदारी आफिसर नौकरशाह और ब्यूरोक्रेट को भी वीआरएस दिए जायेंगे ? संभवत: इस सरकार के लिए भी यह संभव नही होगा। भ्रष्टाचार की जड़ इतना गहरा हो चुका है कि योगी सरकार के बुल्डोजर भी पस्त है। यह तो आने वाले समय में ही पता चलेंगे की किसी वीआरएस दिए जायेंगे और किसे ईनाम। नंद गोपाल नंदी औद्योगिक विकास मंत्री के द्वारा दिए गए ब्यान सराहनीय है लेकिन यह तारे जमीन पर उतरे तो अच्छा होगा।
श्री अनिल के गर्ग नें प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर कई सुझाव दिए थे, जिनमें से भ्रष्ट तंत्र को खत्म करने के लिए वीआरएस की मांग की गई । इसके अलावा लीगल तथा फाइनेंस और प्लानिंग के लिए प्राइवेट कांटेक्ट कंपनी हायर करने की सलाह दी गई। उनका यह भी कहना है कि यह लोग साइट पर जाकर सही रिपोर्ट देंगे। जबकि प्राधिकरण वाले एसी आफिस मै बैठकर ही नक्शा बनाते है उनको नही पता कि 24 मंजिल के बजाय 40 मंजिल बनाये जा रहे है उसके लिए कितना एफएआऱ दिए गए है।