लखीमपुर खीरी समाज जागरण
नगरपालिका, नगर निगम और प्राधिकरण का काम हमेशा शहर, गाँव देहात को सुन्दर और अतिक्रमण मुक्त रखने का होता है लेकिन सोचिये अगर नगरपालिका ही राह में रोड़ा बन जाए तो क्या किसी भी शहर गाँव या कस्बा के लिए विकास संभव है।
ताजा मामला लखीमपुर खीरी का है जहाँ पर एलआरपी मैदान से होते हुए इंदिरा पार्क तक सड़क को 10 मीटर चौड़ा करने के लिए प्रोजेक्ट तैयार करके भेजा गया है। इसके साथ ही एलआरपी से लेकर मेला मैदान तक दुकानों मकानों पर लाल निशान लगाए गए है यानि इसकों हटाना होगा अगर सड़क को 10 मीटर चौड़ा करना है। दूसरी तरफ नगर पालिका सड़क के बीचों बीच शौचालय और सेल्फी प्वाइंट बनाने में व्यस्त है।
सवाल उठता है कि अगर सड़क 10 मीटर की बनती है तो सेल्फी प्वाइंट और पिंक शौचालय कैसे बचेगा ? आखिर इस नुकसान के लिए जिम्मेदार कौन होगा और रिकवरी किस से की जायेगी? नगरपालिका नें बीच सड़क पर ही कई शौचालय और सेल्फी प्वाइंट के निर्माण करवा दिए है। अस्पताल रोड पर भी बीचों बीच में शौैचालय बनाय़ा गया है। अगर नगरपालिका ने ही राह में रोड़े अटका दिए है तो सड़क निर्माण कार्य आखिर कैसे होगा कामयाब ?