*सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र की कामना के साथ निर्जला व्रत रख मनाया करवा चौथ का व्रत।*


   
*उसके चेहरे के चमक के सामने सादा लगा आसमां पे चांद पूरा था मगर आधा लगा।*

*विशेष संवाददाता विनय प्रकाश मिश्रा।*

*कानपुर।* कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व करवा चौथ इस वर्ष 20 अक्टूबर दिन रविवार को पूरे भारतवर्ष में बड़े धूमधाम से मनाया गया । हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सुहागिनों ने  पति की लंबी उम्र की कामना के साथ महिलाओं ने निर्जला व्रत रख करवा चौथ मनाया। इस व्रत की जड़े ऐतिहासिक और भावनात्मक है। करवा चौथ महिलाओं के बीच प्रेम, भक्ति और एकता का प्रतीक है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह व्रत मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं और शाम की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्द्ध  देकर व्रत तोड़ती हैं और अपने पतियों की पूजा कर आशीर्वाद लेती है जिससे उनका वैवाहिक जीवन सुखमय और आनंदमय व्यतीत होता है, करवा चौथ का व्रत कठिन व्रतो में से एक माना गया है। ज्योतिषाचार्य  राजीव पांडे ने बताया कि करवा का अर्थ है करवा यानी मिट्टी का बर्तन जिसे भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है। भगवान गणेश जल तत्व के कारक हैं और करवा में लगी टोटी भगवान गणेश के सूंड का प्रतीक है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सफलता की मनोकामना पूरी होने के लिए व्रत रखती हैं, वही अविवाहित युवतियां सुयोग्य वर की कामना के लिए इस व्रत को धारण करती हैं।