ग्यारह लाख₹ से अधिक का बना अमृत सरोवर आज भी प्यासा है
देश में बनने वाले सरोवरों में यूपी का योगदान लगभग 30 प्रतिशत
देश में 70 हजार से अधिक सरोवरों का हुआ विकास, लगभग 17 हजार यूपी में बने
उत्तर प्रदेश में टॉप-10 में गाजियाबाद और सीएम योगी का गृह जनपद गोरखपुर भी
लखनऊ, 22 जूनः डबल इंजन की सरकार के मंशानुरूप ‘मिशन अमृत सरोवर’ के विकास का कार्य निरंतर तेज गति से हो रहा है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने 80 फीसदी लक्ष्य पूर्ण कर लिया है। देश में अब तक 70158 स्थानों पर अमृत सरोवर विकसित किया गया है। इसमें उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। उत्तर प्रदेश में अमृत सरोवर विकास रिपोर्ट के मुताबिक गाजियाबाद टॉप पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद गोरखपुर भी जबकि टॉप-5 में शामिल है।
अमृत सरोवर विकसित करने में उत्तर प्रदेश अव्वल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अमृत सरोवर विकसित करने में उत्तर प्रदेश अव्वल है। देश में कुल 70158 स्थानों पर अमृत सरोवर का कार्य पूर्ण हो चुका है। उत्तर प्रदेश में अमृत सरोवर निर्माण के लिए 24774 स्थान चिह्नित किए गए। इसमें से 21014 पर कार्य जारी है। 16909 स्थानों पर कार्य पूर्ण हो चुका है। जो लगभग 80 प्रतिशत है। वहीं मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है। यहां 5821 कार्य पूर्ण हुए हैं। अमृत सरोवर योजना के तहत कर्नाटक में 4058, राजस्थान में 3138 सरोवरों का कार्य पूरा हो चुका है। जबकि महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 3079 का है।
गाजियाबाद शीर्ष पर, टॉप-5 में सीएम का गोरखपुर भी
उत्तर प्रदेश में अमृत सरोवर विकास का कार्य काफी तेजी से चल रहा है। 57691 ग्राम पंचायतों में से 16909 अमृत सरोवर का कार्य पूर्ण हो चुका है। यानी लगभग 30 फीसदी का लक्ष्य उत्तर प्रदेश ने निर्धारित किया था, जिसमें से 24.1 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिए गए। वहीं उत्तर प्रदेश के जनपदों पर नजर डालें तो गाजियाबाद शीर्ष पर है। यहां 142 ग्राम पंचायतों में से 100 में अमृत सरोवर (70 फीसदी) का कार्य पूर्ण हो चुका है। महराजगंज में 882 ग्राम पंचायतों में से 601 अमृत सरोवर विकसित हुए। महराजगंज ने 68 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया। बांदा तीसरे स्थान पर है। वहीं मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में 1273 ग्राम पंचायतों में से 737 अमृत सरोवर का कार्य पूर्ण हुआ। 58 फीसदी लक्ष्य हासिल कर गोरखपुर चौथे स्थान पर है। नोएडा पांचवें, रामपुर छठवें, चित्रकूट सातवें, बागपत आठवें, मऊ नौवें और सोनभद्र दसवें स्थान पर है।
धीमी गति से कार्य करने वाले जनपदों को चेतावनी
अमृत सरोवर विकसित करने में कुछ जनपदों की प्रगति धीमी है। सीएम योगी ने इन्हें भी तेजी से कार्य करने की चेतावनी दी है। जिन जनपदों में कार्य की गति धीमी है, उसमें देवरिया, बस्ती, अंबेडकरनगर, संभल, आगरा, बदायूं, बहराइच, मुरादाबाद, हाथरस व बरेली हैं। इन जनपदों में भी 18 से 22 फीसदी कार्य हो चुका है। इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
वर्षा जल संचयन पर योगी सरकार का जोर
योगी सरकार ने वर्षा जल संचयन पर जोर देते हुए कहा कि जल संरचनाओं एवं अमृत सरोवर के कैचमेंट क्षेत्र का विकास कर पुनरूद्धार किया जाये, जिससे अमृत सरोवर एवं जल संरचनाओं में पानी की उपलब्धता बनी रहे। वर्षा जल का संचयन किया जा सके और जल संचयन हेतु मनरेगा योजनान्तर्गत अथवा राज्य वित्त/15वां वित्त के मध्य कन्वर्जेन्स करते हुए निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप नियमानुसार कार्यवाही कराई जाए।
कैचमेंट इंप्रूवमेंट सुनिश्चित करने का निर्देश
वहीं अमृत सरोवर का कैचमेंट इम्प्रूवमेंट सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, जिससे पर्याप्त मात्रा में वर्षा जल अमृत सरोवर में पहुंच सके। गांव का गंदा पानी अमृत सरोवर में न जाए, इसके लिए फिल्टरिंग चैम्बर का प्राविधान सुनिश्चित किया जाए। तालाब के चारों तरफ बंधो के निर्माण में सतहवार कम्पैक्शन सुनिश्चित किया जाए, जिससे बंधों का कटान न हो। जिन तालाबों में सिल्ट आदि जमा हो गई है, उसके पुनरूद्धार के लिए योजना के अन्तर्गत उचित कार्यवाही की जाएगी, इससे वर्षा ऋतु में अधिकाधिक जल का संचयन सुनिश्चित हो सकेगा। ग्राम पंचायतों में नलकूपों तथा नहरों के माध्यम से सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई विभाग तथा अन्य विभागों से समन्वय स्थापित करते हुए अमृत सरोवर में पर्याप्त जल की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।
ग्यारह लाख₹ से अधिक का बना अमृत सरोवर आज भी प्यासा है
दैनिक समाज जागरण विश्व नाथ त्रिपाठी
प्रतापगढ़, विकासखंड बिहार के ग्राम सभा महमदपुर भाव में बने अमृत सरोवर को आज भी है जल का इंतजार, सरकार लाखों करोड़ों खर्च करके प्यास बुझाने के लिए बनाए गए अमृत सरोवर गांव की शान होते हैं यह कई उद्देश्यों को पूरा करते हैं प्राकृतिक प्रेम का संदेश भी देते हैं मगर उपेक्षा के चलते अमृत सरोवर आज भी पानी का इंतजार कर रहे हैं, 2022 में अमृत सरोवर कायाकल्प शुरू हुई थी इसी के तहत कई ग्राम सभाओं अमृत सरोवर बनाए गये जिसमें सिर्फ धूल ही उड़ रही है, विकासखंड बिहार बाघराय के ग्राम सभा महमतपुर भाव का अमृत सरोवर 1142950 रुपए की लागत से बनाया गया था जिसमें आज में धूल उड़ रही है और घास के साथ कुस उगे हैं साथ ही सूखा पड़ा हुआ है, अमृत सरोवर वाला बोर्ड भी प्रधान लगवाना नहीं समझे वह बनाए गए तालाब के जमीन पर पड़ा हुआ है, जबकि इसी अमृतसरोवर के बगल से कुछ ही किलोमीटर के दूरी पर बकुलाही नदी बहती निकलती है साथ ही पास से छोटी नहर भी गुजरती है अमृत सरोवर के पास ही मौजूद गांवों में बहुत से नलकूप लगे हैं इन सभी संसाधनों का उपयोग करके अमृतसर सरोवर में पानी भरा जा सकता है, पर विकासखंड बिहार के जिम्मेदार का ध्यान ही इस ओर नहीं है, और इसी का जीता जागता उदाहरण है कि पानी की एक बूंद महमतपुर भाव में सरकार द्वारा लाखों खर्च करके बनवाए गए अमृतसर सरोवर में नहीं है, जून महीने के भीषण गर्मी में इलाके के जीव जंतु पशु पक्षी इंसान पूरी तरह से बेहाल है,
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