आहार संरक्षण एवं कर्तव्यबोध हेतु छात्राओं को दिया गया भोजन संरक्षण संस्कार

शासकीय कन्या शिक्षा परिसर पुष्पराजगढ़, जिला अनूपपुर के विशिष्ट आवासीय विद्यालयीन छात्राओं को नैतिक मूल्य, कर्तव्यबोध के साथ संस्कार की शिक्षा जरूरी है | संस्कार शिक्षा और भोजन संरक्षण के लिए छात्राओं को जागरुक किया गया एवं संकल्प कराया गया | मनुष्य एवं जीव जंतुओं के लिए भोजन अति आवश्यक है जिसके लिए हर मनुष्य भोजन की तलास मे अनिवार्य कार्य करता है | भोजन के बिना जिंदगी चल पाना असंभव है, हमे भोजन करने के पूर्व संकल्प लेना जरूरी है जिससे भोजन व्यर्थ ना जाए | शादी या किसी समारोह में जाने से पता चला है कि अक्सर स्वादिष्ट भोजन बहुत मात्रा में फेक दिया जाता है जिससे कुछ मेहमानों के लिए भोजन घट जाता है | विद्यालय में पदस्थ नवाचारी शिक्षक श्री डी ए प्रकाश खाण्डे ने भोजन संस्कार हेतु छात्राओं को संकल्प कराये और भोजन संरक्षण अभियान मे सहयोग करने हेतु जागरुक किये |

सात्विक भोजन मे विद्यार्थी के व्यवहार और संस्कार निहित

भोजन शरीर तथा मन-मस्तिष्क पर काफी गहरा प्रभाव डालता है, आयुर्वेद में आहार को अपने चरित्र एवं प्रभाव के अनुसार सात्विक, राजसिक तथा तामसिक रूपों में वर्गीकृत किया गया है | कौन व्यक्ति कैसा भोजन पसंद करता है,यह जानकर उसकी प्रकृति व स्वभाव का अनुमान लगाया जा सकता है इसलिए विद्यार्थियों को सात्विक भोजन करना चाहिए | सात्विक भोजन सदा ही ताज़ा पका हुआ, सादा, रसीला, शीघ्र पचने वाला, पोषक, चिकना, मीठा एवं स्वादिष्ट होता है | यह मस्तिष्क की उर्जा में वृद्धि करता है और मन को प्रफुल्लित एवं शांत रखता है, सोचने-समझने की शक्ति को और भी सबल बनाता है। सात्विक भोजन शरीर और मन को पूर्ण रूप से स्वस्थ रखने में बहुत अधिक सहायक है | गाय का दूध, घी, पके हुए ताजे फल, बादाम, खजूर, सभी अंकुरित अन्न व दालें, टमाटर, परवल, तोरई, करेला जैसी सब्जियां, पत्तेदार साग सात्विक मानी गयीं हैं। घर में सामान्यतः प्रयोग किये जाने वाले मसाले जैसे हल्दी, अदरक, इलाइची, धनिया, सौंफ और दालचीनी सात्विक होते हैं | जो व्यक्ति सात्विक आहार लेते हैं उनमें शांत व सहज व्यवहार, स्पष्ट सोच, संतुलन एवं आध्यात्मिक रुझान जैसे गुण देखे जाते हैं | सात्विक व्यक्ति आमतौर पर शराब जैसे व्यसनों, तम्बाकू और मांसाहारी भोजन जैसे उत्तेजक पदार्थों को ग्रहण नही करते हैं |

छात्राओं ने लिए संकल्प

(1) मैं भोजन कक्ष में प्रवेश करने के पूर्व हाथ मुँह धोकर पवित्र मन से जाऊंगी | (2) मैं भोजन कक्ष में पंक्तिबद्ध होकर आसन ग्रहण करके भोजन प्राप्त करूँगी तथा शांत भोजन करूँगी | (3) मै भोजन के किसी भी अंश की अनावश्यक बुराई नही करूँगी | (4) मैं भोजन कक्ष मे झूठी थाली या प्लेट नही छोड़ूंगी तथा भोजन कक्ष को साफ सुथरा रखने मे मदद करूँगी | (5) मै भोजन की थाली के प्रत्येक दाने का सम्मान करूँगी | (6) मै किसी भी सामाजिक धार्मिक समारोह में अधिक भोजन नही लूंगी जिससे वह भोजन फेंका ना जाए | (7) मै साफ थाली अभियान का सदस्य बनकर भोजन संरक्षण की सबल बनाऊँगी |

संरक्षण के उपाय

भोजन को अधिक समय के लिए उपयोगी एवं सुरक्षित बनाने के लिए फ्रिज, रेफरीजरेटर का उपयोग करते हैं | भोजन को सुरक्षित तापमान और वातावरण में रखने से हानिकारक कीटों को बढ़ने से रोकता है, भोजन संरक्षण के विभिन्न तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है | खराब होने वाले खाद्य पदार्थ को फ्रिज में 5 डिग्री सेल्सियस यानी 41डिग्री फारेनहाइट से कम तापमान पर रखना चाहिए, ऐसा करने से भोजन में बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं और खाना जल्दी खराब नहीं होता है | कुछ भोजन या खाद्य पदार्थों को अधिक उपयोगी बनाने के लिए शुष्क विधि के द्वारा संरक्षित रखने का प्रयास करते हैं | भोजन को कहीं भी नही फेकें, वह बचा हुआ भोजन किसी की जिंदगी है, उस भोजन से किसी भी जीव का जान बचा सकता है | मनुष्य का भोजन पशु पक्षी भी ग्रहण करते हैं इसलिए भोजन का सम्मान करते हुए संरक्षण करें |