पुलिस मुख्यालयों में उच्च अधिकारियों की नहीं, बल्कि स्टोनो और रिडरों की हैं बोल बाला

तभी तो पचपेड़ी थाना के आरक्षक भानु प्रताप डहरिया के खिलाफ विभागीय जांच चल रहा है फिर भी उसे लाइन डीएसपी के कार्यालय में लिया जा रहा ड्यूटी

समाज जागरण संवाददाता विवेक देशमुख

बिलासपुर। बिलासपुर के पुलिस मुख्यालय में बड़े अधिकारियों के नहीं बल्कि वहां बैठे स्टोनो और बाबू की चलती है, मुख्यालय में बैठे स्टोनो,बाबू किसी भी आरक्षक को अपनी और उसकी मनचाही जगह पर भेज सकते हैं। चाहे उन सिपाहियों के ऊपर विभागीय जो भी जांच चलता हो वह मायने नहीं रखता। सूत्रों की माने तो पुलिस विभाग के बड़े-बड़े कार्यालय में सिर्फ कोरे लिफाफे का बोलबाला होता है स्टेनो बाबू को लिफाफा टिकाव और मनचाहे जगह पर अपनी पोस्टिंग कराओ तभी तो मस्तूरी क्षेत्र के थाना मस्तूरी ,मल्हार, पचपेड़ी, में ऐसे कई सिपाही हैं जो लगातार जमे हुए हैं, उनकी पोस्टिंग अगर दूसरे जगह होती है तो मुश्किल से एक माह ही दूसरे थाने मे टिक पाते हैं।

उसके बाद फिर से उसी थाने में पोस्टिंग ले रहे हैं। और यह सारा खेल पुलिस मुख्यालय में बैठे स्टोनो और रीडर लोगों की मेहरबानियां की वजह से हो रहा है। मस्तूरी मुख्यालय मे दो थाना पचपेड़ी और मस्तूरी है और एक चौकी मल्हार पड़ता है। आपको जानकारी के लिए बताते चलें कि केवल मस्तूरी थाना में नौ ऐसे सिपाही हैं जो लोकल मस्तूरी क्षेत्र के ही है , वैसा ही हाल पचपेड़ी थाना का भी है जहां पचपेड़ी थाना में दस लोकल सिपाहियों का खूब बोलबाला है ऐसे में मल्हार चौकी कैसे छूट जाता वहां भी चौकी में 6 लोग स्थानीय सिपाही है।

औसतन देखा जाए तो मस्तूरी मुख्यालय की तीनों दो थाना और एक चौकी कर के कूल 25 पुलिस वालों की ड्यूटी लगाई गई है। जिसके कारण थाना की गोपनीयता भंग होती दिख रही है और इन्हीं वजह से क्षेत्र में जगह-जगह अवैध शराब जैसे बिक्री हो रहे हैं लोकल पुलिस वालों की होने की वजह से लोगों में पुलिस का खौफ खत्म हो गया है और हर कोई दो नंबर के कामों को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं। जिसका सीधा सीधा जवाब दार उच्च अधिकारियों के कार्यालय में बैठे रीडर स्टोनो का खेल दिख रहा है।आपको बताते चलें कि कुछ महीने पहले पचपेड़ी थाना में भयंकर बवाल हो गया था पचपेड़ी थाना के आरक्षक भानू डहरिया के खिलाफ विभागीय जांच चल रहा फिर भी उसे लाइन डीएसपी के कार्यालय में ड्यूटी लिया जा रहा है एक तरफ पुलिस अधीक्षक महोदया के द्वारा फरमान जारी किया था कि शिकायत और विभागीय जांच चल रहे अधिकारियों और कर्मचारियों को लाइन में ड्यूटी करना होगा |

ऑफिस या किसी थाना में पोस्टिंग नहीं दिया जाएगा इसके विपरित आरक्षक भानू डहरिया को लाइन डीएसपी के ऑफिस में लिपिक के कार्य लिया जा रहा है सूत्रों के मुताबिक उक्त आरक्षक विभागीय जांच प्रक्रिया की गोपनीय जानकारी को प्राप्त कर अपने खिलाफ चल रही विभागीय जांच में सवाल खड़े कर पाने के नियत से जुगाड लगा कर ड्यूटी कर रहे है जो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के फरमान के विपरित है। अब देखना यह होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव नजदीक पर है और ऐसे में लोकल सिपाहियों के होने से क्या चुनाव प्रक्रिया भी निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से निपटेगा। या फिर पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए क्या उचित कदम उठा पाएंगे।