समाज जागरण रंजीत तिवारी
वाराणसी।जिले में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्ण शिखर से सोना गायब होने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता नित्यानंद राय एडवोकेट की शिकायत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय ने मामले में संज्ञान लिया।
इसके बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिला प्रशासन के मुताबिक, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह से लेकर पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तथा उनकी फोटो भी संरक्षित की जाती है। विश्वनाथ मंदिर न्यास मंदिर के स्वर्ण शिखर के बिना किसी छेड़छाड़ के धार्मिक तथा पुरातात्विक महत्व को बचाते हुए उसके मरम्मत करने के लिए आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों से संपर्क में है।

काशी विश्वनाथ में स्वर्ण प्लेट गायब दरअसल, काशी के रहने वाले और पेशे से एडवोकेट नित्यानंद राय ने 23 सितंबर को प्रधानमंत्री के कार्यालय को पत्र लिखते हुए अवगत कराया था कि वह प्रतिदिन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन करने जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वह उत्तर दिशा की ओर शिखर का दर्शन करते हैं। इस दौरान उनकी नजर वायव्य कोण पर गई, जिसके बाद ज्ञात हुआ कि उसे स्थान पर स्वर्ण प्लेट नहीं दिख रही थी। नित्यानंद ने बताया है की रात्रि का समय होने का कारण उन्हें कुछ भ्रांति हुई, लेकिन दोबारा जब दिन में वहां जाकर देखा गया तो स्वर्ण प्लेट एक जगह पर लगभग 2 से 3 फीट तक नहीं था।
*एक नहीं कई स्थानों से सोना गायब*
प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखे पत्र में नित्यानंद ने बताया है कि इसी प्रकार से दो अन्य स्थानों पर भी स्वर्ण प्लेट टूटी हुई दिखाई दी। इसके बाद उन्हें काफी चिंता हुई, लेकिन इस संबंध में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कुछ बोल नहीं सका। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी दौरान उत्तर दिशा में भी एक जगह छोटे से गोल घेरे की शक्ल में स्वर्ण दिखाई नहीं दिया। उन्होंने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के ऊपर लगे स्वर्ण के कई जॉइंट्स में जगह-जगह कट दिखाई दे रहे हैं, जिनको मरम्मत कराए जाने की अति आवश्यकता है।
नित्यानंद ने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पूरे विश्व के हिंदू समाज के लिए एक बड़ा आस्था का केंद्र है। उन्होंने मांग की है कि यदि स्वर्ण प्लेट का हिस्सा टूटा है और संरक्षित किया गया है तो उसे तुरंत ही लगाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में पूर्व में भी स्वर्ण चोरी की घटनाएं हो चुकी है। इसलिए उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि कोई अनहोनी ना हो। नित्यानंद ने बताया कि हो सकता है कि मंदिर में बंदर घूमते रहते हैं, उन्होंने सोना तोड़ लिया हो और कहीं फेंक दिया हो। ऐसे में वहां तैनात जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वह टूटे ही हुए हिस्से को उठाकर संरक्षित रखें।
*आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत*
इस संबंध में आइजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत पर भी नित्यानंद ने असंतोष जताया है। दरअसल, आईजीआरएस की रिपोर्ट में बताया गया है कि मंदिर परिसर पूरी तरीके से सीसीटीवी कैमरा से लैस है और स्वर्ण शिखर से किसी भी प्रकार से छेड़छाड़ किया जाना संभव नहीं है। मंदिर प्रशासन मंदिर के ऐतिहासिक महत्व और स्वर्ण शिखर के महत्व को समझता है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वर्ण शिखर की मरम्मत करने के लिए आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों से संपर्क किया जा रहा है।
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