समाज जागरण/ अवधेश कुमार गुप्ता
सोनभद्र। जनपद में सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद वामदलों के प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वामदल नेताओं ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जन आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों से पहले नेताओं और कार्यकर्ताओं को नजरबंद करने, गैर-कानूनी हिरासत में रखने, फर्जी मुकदमे दर्ज करने तथा शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत जारी है तथा असहमति व्यक्त करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और मजदूर नेताओं पर कार्रवाई की जा रही है।
वामदलों ने अपने ज्ञापन में कई मांगें भी रखीं। इनमें जन आंदोलनों से पहले नेताओं और कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट करने की कार्रवाई पर रोक लगाने, धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन देने की अनुमति सुनिश्चित करने, विपक्षी दलों के नेताओं के विरुद्ध केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने, मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम प्रकरण में दोषियों पर कार्रवाई, कथित फर्जी एनकाउंटरों पर रोक लगाने, मजदूर आंदोलनों में गिरफ्तार लोगों की रिहाई तथा दलित, महिला और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर प्रभावी कार्रवाई जैसी मांगें शामिल रहीं। इस दौरान कम्युनिस्ट नेताओं ने सोनभद्र जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
उनका कहना था कि कलेक्ट्रेट परिसर के पिछले हिस्से में निर्धारित धरना स्थल पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहां न तो पर्याप्त शेड की व्यवस्था है और न ही पेयजल एवं शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। नेताओं ने मांग की कि धरना-प्रदर्शन के लिए कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गांधी उद्यान को अधिकृत धरना स्थल घोषित किया जाए, ताकि प्रदर्शनकारियों को आवश्यक सुविधाएं मिल सकें और अधिकारी भी आसानी से ज्ञापन प्राप्त कर सकें। प्रदर्शन में भाकपा जिला सचिव आर.के. शर्मा, माकपा जिला सचिव नंद लाल आर्य, भाकपा (माले) जिला सचिव सुरेश कोल, बसावन गुप्ता, चंदन प्रसाद, मोहम्मद कलीम, प्रेमनाथ, नागेंद्र प्रसाद, महेंद्र सिंह, राजबली, हनुमान प्रसाद, नंदलाल यादव, ईश्वर दयाल, श्याम नारायण सिंह, गीता देवी, परमेश्वरी देवी सहित बड़ी संख्या में वामपंथी कार्यकर्ता शामिल रहे।
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