
नई दिल्ली। “कौन कहता है आसमां में सुराख़ नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…” — इसी भावना के साथ आज एक सांसद ने डिलीवरी राइडर्स से मुलाकात कर उन्हें 10 मिनट डिलीवरी से निजात मिलने पर बधाई दी।
सांसद ने कहा कि यह निर्णय सिर्फ एक भाषण की गूंज नहीं, बल्कि देश के लाखों–करोड़ों मेहनतकश और ईमानदार गिग वर्कर्स के लंबे संघर्ष की जीत है। वर्षों से परेशान डिलीवरी एजेंट्स लगातार समय की मार, सड़क दुर्घटनाओं और कंपनियों के दबाव को झेलते आ रहे थे।
सांसद ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने गिग वर्कर्स के दर्द और मजबूरी को समझकर राहत देने का बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे पर देशभर में सकारात्मक बहस और नीतिगत सुधारों की शुरुआत हो चुकी है, जो श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान के लिए महत्वपूर्ण है।
गिग वर्कर्स ने भी इस निर्णय को अपने जीवन और परिवारों के लिए बड़ी राहत बताया है। उनका कहना है कि अब वे बिना किसी अनावश्यक दबाव के सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से काम कर सकेंगे।
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