बेटी की शिक्षा के लिए नंगे पैर मैराथन दौड़ने वाली मां के जज्बे को सलाम, दोनों बेटियों की शिक्षा में सहयोग करेगा फाउंडेशन
समाज जागरण | रंजीत तिवारी
वाराणसी। महाराष्ट्र के बीड जिले के अंबाजोगाई की 47 वर्षीय रमाबाई रणवीर ने अपने साहस, संघर्ष और मातृत्व की अद्भुत मिसाल पेश कर देशभर में लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। बेटी की शिक्षा के लिए पुरस्कार राशि जुटाने के उद्देश्य से रमाबाई ने नंगे पैर मैराथन में दौड़ लगाई। उनके इस साहस और दृढ़ संकल्प ने लाखों लोगों को प्रेरित किया।

रमाबाई की कहानी सिर्फ एक मां के संघर्ष और ममता की कहानी नहीं है, बल्कि यह बच्चों की शिक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति का प्रेरणादायी उदाहरण है।
‘अवादा नारी शक्ति सम्मान’ से सम्मानित
रमाबाई के अदम्य साहस और संघर्ष को सम्मानित करते हुए अवादा ग्रुप की सीएसआर शाखा अवादा फाउंडेशन ने नांदेड स्थित एक कॉलेज परिसर में विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया। इस दौरान रमाबाई रणवीर को ‘अवादा नारी शक्ति सम्मान’ प्रदान किया गया।
सम्मान समारोह में उनके संघर्ष, साहस और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए किए जा रहे प्रयासों को सराहा गया। यह सम्मान उन महिलाओं के साहस, आत्मनिर्भरता और दृढ़ इच्छाशक्ति को समर्पित है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने परिवार और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर प्रयास करती हैं।
बड़ी बेटी को दिया लैपटॉप, शिक्षा में भी करेगा सहयोग
अवादा फाउंडेशन ने रमाबाई की बड़ी बेटी आरती को पढ़ाई के लिए लैपटॉप भी प्रदान किया है। आरती नांदेड में बीएससी की पढ़ाई कर रही हैं। फाउंडेशन की ओर से उन्हें आवश्यकता के अनुसार आगे भी शैक्षणिक सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
फाउंडेशन का उद्देश्य आरती की शिक्षा और करियर के लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग करना तथा उन्हें बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक अवसर उपलब्ध कराना है।
‘शिक्षा सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम’
अवादा फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने कहा कि रमाबाई का संघर्ष केवल एक मां के स्नेह की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस अटूट नारी शक्ति का प्रतीक है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानती।
उन्होंने कहा कि अवादा फाउंडेशन का मूल विश्वास है कि सामाजिक प्रगति के लिए शिक्षा, सशक्तिकरण और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। रमाबाई अपने बच्चों को शिक्षा के माध्यम से बेहतर भविष्य देने का जो सपना देख रही हैं, फाउंडेशन उनके उस जज्बे और सपने के साथ खड़ा है।
प्रतिनिधि के अनुसार शिक्षा सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम है। रमाबाई रणवीर की कहानी इस विश्वास को मजबूत करती है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा के माध्यम से आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।
महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के लिए प्रतिबद्धता
रमाबाई को सम्मानित करने और उनकी बेटियों की शिक्षा में सहयोग की यह पहल महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक विकास के प्रति अवादा फाउंडेशन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
गौरतलब है कि अवादा फाउंडेशन, अवादा ग्रुप की सीएसआर शाखा है, जो देशभर में पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। फाउंडेशन विभिन्न सामाजिक पहलों के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक बदलाव को बढ़ावा देने तथा समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
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