अद्भुत मंदिर में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक साल के बारह महीने निरंतर, प्रत्येक पल स्वयं मां गंगा द्वारा किया जाता है।
टूटी झरना मंदिर की विशेषता का पुराणों में भी मिलता है उल्लेख।
दैनिक समाज जागरण श्रवण सिंह ब्यूरो चीफ रामगढ़ झारखण्ड
रामगढ़ (झारखण्ड) 18 फरवरी :- झारखंड का रामगढ़ एक खनिज संपदा से परिपूर्ण स्थान तो है ही, साथ मे आस्था का एक चमत्कारिक स्रोत भी है जहां पर एक ओर मां भगवती ,मां छिन्नमस्तिके, विराजमान है , तो दूसरे तरफ स्वयंभू महादेव स्वयं बैठे हुए है । और तो और स्वयं मां गंगा प्रतिदिन 24 घंटे 12 महीना अपने जल से महादेव को जलाभिषेक करती हैं । जी हां ऐसा ही एक मन्दिर है रामगढ़ में , जिसे हम प्राचीन शिव मन्दिर ,टूटी झरना, के नाम से ख्याति प्राप्त और प्रसिद्ध हैं।
स्वयं मां गंगा करती है जलाभिषेक
इस अद्भुत मंदिर में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक साल के बारह महीने निरंतर, प्रत्येक पल स्वयं मां गंगा द्वारा किया जाता है। कहते है कि मां गंगा द्वारा शिवलिंग का यह जलभिषेक सदियों से निरंतर होता चला आ रहा है।
यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है, कि आखिर इस पानी का स्रोत कहां है, ? पानी आता कहाँ से है ? कहते है कि इस रहस्यमयी मंदिर का वर्णन पुराणों में भी है। शिव भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में सच्ची श्रद्धा से मांगी गयी प्रत्येक मनोकामना अवश्य ही पूर्ण हो जाती हैl
अंग्रेजों के जमाने से जुड़ा हुआ है इतिहास
स्थानीय लोग बताते है कि वर्ष 1925 में अंग्रेज सरकार ने इस स्थान पर रेलवे लाइन बिछाने के लिए खुदाई का कार्य शुरू किया, तब कुछ समय के उन्हें जमीन के अंदर कोई गुंबद के आकार की चीज नजर आई। जब उसे सावधानी से और खोदा गया तो वहां पर नीचे गहरे में एक अति प्राचीन पूरा शिवलिंग मिला और इस शिवलिंग के ठीक ऊपर माँ गंगा की प्रतिमा मिली जिनकी हथेली पर से होते हुए शिवलिंग पर जल गिर रहा था ।
चमत्कार की बात यह थी कि आस पास कोई भी जल का स्रोत्र नहीं था, इसी कारण यह रहस्यमय मंदिर भक्तो की आस्था का केंद्र बन गया है।
कोई नहीं जानता है की यह अदभुत मंदिर जिसमें माँ गंगा भगवान शिव का जलाभिषेक कर रही है किसने बनाया है और कितना प्राचीन है ।
कहते हैं जब अंग्रेजों को इस मंदिर की जानकारी हुई और उन्होंने स्वयं इस चमत्कार को अपनी आंखों से देखा तो अंग्रेज लोग भौंचक्के हो गए। उन्होंने इस बात की अच्छी तरह से पडताल कराई की शिवलिंग के ऊपर जल कहाँ से गिर रहा है लेकिन काफी खोजबीन के बाद भी वे पता नहीं लगा पाएं की जल कहाँ से आ रहा है और उन्होंने भी इसे ईश्वर का ही चमत्कार मान लिया ।
चमत्कारिक जल से आरोग्य की प्राप्ति होती है
वर्तमान मंदिर के पुजारी शैलेश ओझा उर्फ (उमेश पांडे) एवम छवि नाथ मिश्र का कहना है की
‘टूटी झरना’ मंदिर की महत्ता के कारण लोग यहां पर दूर-दूर से दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पूरे वर्ष भर मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है लेकिन सावन में यहाँ पर तो श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ आती है । एवं प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि के दिन मेले का आयोजन किया जाता हैl
यहाँ पर श्रद्धालु शिवलिंग पर गिरने वाले गंगा जल को प्रसाद के रूप में लेते हैं, मान्यता है इस जल को पीने से सभी संकट और रोग दूर होते है , आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।










कौतूहल का विषय है नाग देवता का अठखेलियां खेलना
मंदिर का गर्भगृह जहां भगवान शिव शंकर का शिवलिंग स्थापित है वहां पर सालों भर नाग देवता का दर्शन भक्तों को होता रहता है कभी-कभी नाग देवता शिवलिंग के ऊपर अठखेलियां करते दिखाई देते हैं जो श्रद्धालुओं के लिए काफी कौतूहल का विषय रहता है जो भक्त नाग देवता का दर्शन करते हैं वह अपने आप को काफी भाग्यशाली महसूस करते हैं
मां गंगा का महिमा है अपरंपार
मंदिर के ठीक पूर्वी छोर पर 50 मीटर दूर एक हैंडपंप है जो लगातार कई वर्षों से पानी की धारा अपने आप बहती रहती है जो भक्त यहां आते हैं वे इस पानी का उपयोग पूजा एवं स्नान में करते हैं इसी के बगल में एक नदी भी गुजरती है जो गर्मी के दिनों में सूख जाती है पर इस नल का पानी अभी तक नहीं सुखा है 24 घंटा हैंडपंप से पानी निकलता रहता है जो काफी कौतूहल का विषय बना हुआ है
पर्यटन की दृष्टि से
सरकार का योगदान पर्यटन के क्षेत्र में काफी सराहनीय कदम रहा है इस क्षेत्र के लिए यहां पर नई-नई भवनों एवं बैंकट हॉल बनाए गए हैं जो भी श्रद्धालु लोग बाहर से आते हैं उन्हें ठहरने में सुविधा होती है
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