
दैनिक समाज जागरण
विश्वनाथ आनंद
टेकारी (गया बिहार):- अमर कारगिल शहीद रामपुकार शर्मा की 22 वी शहादत दिवस उनके पैतृक गांव कुतलूपुर में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न किया गया। इस अवसर पर शहीद के भाई धनंजय शर्मा, प्रमोद कुमार, सुबोध कुमार ,वेंकटेश शर्मा,मिथलेश शर्मा,बालमुकुंद कुमार,धीरेश कुमार, छात्र नेता सौरव कुमार,सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु शेखर, सरपंच प्रतिनिधि राहुल शर्मा ,पैक्स अध्यक्ष सुबोध शर्मा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे। हिमांशु शेखर ने कहा कि रामपुकार शर्मा की शहादत के अवसर पर नेतागण एवं पदाधिकारियों ने वादों की झड़ी लगा दिया, लेकिन आज तक वे वादे अधूरे रह गए। आज भी केसपा से कुतलूपुर का मार्ग अधूरा है। पटना के कारगिल चौक पर बिहार के सभी कारगिल शहीदों का नाम अंकित है, लेकिन जातीय राजनीति की वजह से शहीद रामपुकार शर्मा को स्थान नहीं दिया गया है। शहीदों के साथ भेदभाव करना राष्ट्रद्रोह के समान है। उपस्थित लोगों ने सरकार से जल्द से जल्द अपने वादे पूरा करने की मांग किया है। वही सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु शेखर ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने सभी कारगिल शहीदों को घर जाकर स्वयं सहायता राशि प्रदान किया था l उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ जातीय राजनीति की वजह से उन्होंने राम पुकार शर्मा के घर जाना मुनासिब नहीं समझा l उन्होंने आगे कहा कि लालू प्रसाद ने जातीय आधार पर शहीदों के साथ भेदभाव किया जो शहीद का अपमान है l लालू प्रसाद को अपने इस अपराध के लिए राम पुकार शर्मा के परिवार से क्षमा मांगना चाहिए l
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