कियोस्क को वेंडिंग जोन नीति मे शामिल करे प्राधिकरण, स्थानीय वेंडर को मिले प्राथमिकता: श्याम किशोर गुप्ता।

नोएडा प्राधिकरण के द्वारा बनाए जा रहे कियोस्क एक सराहनीय कदम है लेकिन उसमे स्थानीय वेंडर जो उसके आस-पास मे काम कर रहे है उनको प्राथमिकता मिलनी चाहिए। ताकि वेंडर को रोजगार मिले और हमारा शहर भी स्मार्ट एवं सुन्दर लगे।

रेहड़ी पटरी संचालक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्याम किशोर गुप्ता ने नोएडा प्राधिकरण के द्वारा कियोस्क बनाए जाने का स्वागत किया है लेकिन उन्होंंने कहा है कि अगर नोएडा प्राधिकरण पहले उस वेंडर को दे जो उसी जगह या उसके आस-पास मे कार्यरत है। वह वेंडर जिनका फार्म जमा है या फिर कोर्ट के माध्यम से उनको जोन मे दुकान देने की आदेश है पहले उनको दिया जाना चाहिए अगर वह लोग इच्छुक है। अगर उन वेंडर मे से कोई कियोस्क लेने मे असहज महसूस करता है या फिर नही लेना चाहता तो इसका आनलाइन निविदा के माध्यम से आवंटन हो।

हजारों के संख्या में वेंडर कियोस्क लेने के लिए तैयार है

श्री गुप्ता ने नोएडा सेक्टर 18 के हवाले देते हुए कहा है कि “प्राधिकरण ने विभिन्न जगहो पर कियोस्क बनाए है लेकिन जिन लोगों को दिया गया है या जिन लोगों ने लिया है उन लोगों ने किराये पर लगा दिया है। जाहिर सी बात है अगर उन्होंने किराये पर लगा दिया है तो उनके पास मे और भी कई काम होंगे। जबकि हजारों के संख्या मे वेंडर है जो लोग स्वयं चलाने के लिए इच्छा रखते है। इससे एक व्यक्ति को रोजगार मिलेगा और शहर भी स्वच्छ व सुन्दर दिखेगा। भारत सरकार के पथ विक्रेता अधिनियम भी यह कहती है। श्री गुप्ता ने यह टिप्पणि नोएडा सेक्टर 38 ए जीआईपी मॉल गेट नंबर 2 के बराबर मे संभावित कियोस्क जोन को लेकर किया है।

बताते चले कि नोएडा प्राधिकरण के द्वारा सन 2018 मे पथ विक्रेताओं के फार्म मंगवाए गए थे। 8250 वेंडर ने फार्म जमा किया जो कि वर्तमान मे 7600 बताए जा रहे है। लेकिन 2018 के बाद से अभी तक सात साल बीत जाने बाद भी मात्र 4946 वेंडर को स्थान दिया गया है। जबकि नोएडा मे लगभग 40 हजार के आस-पास मे वेंडर है और नित्य नये दिए एक नयी जगह पर दुकान लग जाते है। नोएडा सेक्टर 42 सड़क पर लग रहे फल मंडी उसका उदाहरण है। जाहिर सी बात है नोएडा प्राधिकरण के खाते मे भले ही सुविधा शुल्क नही जा रहे होंगे लेकिन प्राधिकरण के आफिसर और सुपरवाइजरों की मेहरबानी तो अवश्य ही होगा।