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चोरचिता का बाबा चोरेश्वर मंदिर भक्ति एवं आस्था का अटूट केन्द्र है, उमड़ती है भक्तों की जनसैलाब

▪️भक्तों द्वारा धातु से बने छोटे-छोटे त्रिशूल जीभ में छेद कर नंगे पैर ढोल बाजे के साथ समूह में थिरकते हुए बेंत की छड़ी एक दूसरे के छड़ी से टकराते हुए नदी घाट से मंदिर पहुंचकर परिक्रमा करने का दृश्य आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

बिभूति भूषण भद्र दैनिक समाज जागरण झाड़ग्राम जिला संवाददाता

झाड़ग्राम जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर तथा गोपीबल्लभपुर प्रखंड दो के बेलियाबेड़ा थाना अंतर्गत चोरचिता गांव में अवस्थित बाबा चोरेश्वर महादेव मंदिर में चैत्र पर्व के दौरान आराधना का विशेष महत्व है। यहां आने वाले हर व्यक्ति की मनोकामना पूरी होती है। बताया जाता है कि लगभग 414 वर्ष पुराना चोरेश्वर महादेव मंदिर पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त पड़ोसी राज्य उड़ीसा एवं झारखंड के लिए काफी प्रसिद्ध है। देश के विभिन्न प्रांतो से भी लोग यहां चैत्र पर्व के मौके पर भगवान शिव के पूजा अर्चना व जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में वृहत आकार में मेले लगाए जाते हैं। पूरे रातभर मेले देखने के लिए लोग काफी आतुर रहते हैं। स्वर्णरेखा नदी के तट पर स्थित चोरचिता का यह प्राचीन मंदिर विश्वास भक्ति एवं आस्था का अटूट केंद्र है। यहां प्रत्येक वर्ष चैत्र संक्रांति काफी भक्ति भाव व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। चैत्र संक्रांति की पूर्व संध्या पर यहाँ महासमारोह ‘गाजन’ मेला का आयोजन किया जाता है। बताया जाता है कि यह मेला पश्चिम बंगाल का चौथा सबसे बड़ा धार्मिक मेले में से एक है। लगभग लाखों की संख्या में लोग एकत्रित होते हैं। मेले में जीभफोड़, चाटुफोड़, रजनीफोड़, अग्निपाट आदि विशेष आकर्षण रहता है। वहीं मुख्य भक्तापाट जो मध्य रात्रि में भव्यता के साथ गोरियभार गाजे बाजे के साथ निकलती हैं। इस दौरान कई भक्त बीमारियां तथा पीड़ाओं से छुटकारा पाने एवं संतान के स्वास्थ्य की कामना के लिए इस पूजा का व्रत और संकल्प लेते हैं। लोग गोरियाभार की भव्य जुलूस को देखने तथा पवित्र जल प्राप्त करने के लिए लगभग 1 किलोमीटर सड़क के दोनों और कतार लगाकर तथा दीये जलाकर गोरियाभार आने का इंतजार करते हैं। गोरियाभार आगमन के समय दंडवत प्रणाम कर कुशलता का कामना करते हैं। मान्यता है कि गोरियाभार का पवित्र जल के सेवन करने से मनवांछित फल पाना शाश्वत सत्य है। इस दौरान व्रतियों द्वारा निर्जला उपवास रखकर शुद्ध घी के दीये जलाकर भक्ति भाव से प्रार्थना करती हैं,जिससे उनके मनोकामनाएं पूर्ण होती है।


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