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बाघ का शिकार: 11 आरोपियों ने बिछाया था बिजली करंट का जाल, सबूत समेत गिरफ्तार….





शहडोल। लगातार वन्यजीव अपराध नियंत्रण बाघ के करंट लगाकर शिकार और टेरिटरी फाइट के बढ़ते आंकड़े को देखा जा रहा इस मामले में मीडिया को भी ठीक उतनी ही जानकारी दी जाती है जितना टाइगर रिजर्व चाहता है बहरहाल शहडोल में बाघ के शरीर के अंगों के अवैध व्यापार को तथाकथित सफेदपोश एवं वनविभाग के शीर्ष पदों पर आसीन अफसर कभी कभार तो शासकीय अफसर और तस्करों के आपसी संघर्ष को भी देखा और यह भी सुना होगा कि शिकारियों और तस्करों को ब्लैकमेल करके भी कमाई करता था। बीते कुछ सालों में ऐसी जानकारी सामने आई जिसमें जिम्मेदार अफसर बाघ एवं तमाम राष्ट्रीय संरक्षित वन्य जीव प्राणी के संरक्षण की दिशा भटक चुके हैं और इस अवैध धंधे को नियंत्रित करने के लिए वन्य प्राणी संरक्षण का लागू कानून पर काम करने वाली एजेंसियों के साथ साठगांठ कर काम करता था।
वन्य प्राणी अधिनियम एवं संरक्षण मामलों के विधिक जानकारो के “दिमाग का खेल ऐसा ही है। कई बार एजेंसियों को ऐसे लोगों से जानकारी मिलती है जिनकी मंशा शक के दायरे में हो सकती है। इस धंधे में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं।
शुक्रवार जिले के मुख्य वन संरक्षक वन वृत्त शहडोल एल.एल. उइके एव वनमण्डलाधिकारी दक्षिण शहडोल सुश्री श्रद्धा पन्द्रे के कुशल मार्ग दर्शन एवं नेतृत्व में वनमण्डल दक्षिण शहडोल अन्तर्गत वनपरिक्षेत्र जैतपुर में मृत बाघ का शव पाये जाने की खबर लगी, खबर मिलते ही विभागीय तंत्र एक्टिव हुआ आनन-फानन में जिले की तेजतर्रार डीएफओ (दक्षिण) सुश्री श्रद्धा पन्द्रे द्वारा मौका पर पहुंच कर तुरन्त मौका मुआयना किया घटना स्थल पर पहुँचकर बाघ मृत्यु के समय एन.टी.सी.ए. द्वारा जारी एस.ओ.पी. के तहत डाग स्क्वायड दक्षिण वनमण्डल शहडोल द्वारा विधिवत सर्चिंग करायी गई।

हम आपको बता दें कि सर्चिंग के बाद जारी गाइडलाईन अनुसार पंचनामा को संयुक्त टीम जिसमें राजस्व विभाग के अधिकारी तहसीलदार एवं प्रभारी तहसीलदार, ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि, एन.टी.सी.ए. के प्रतिनिधि, वनमण्डलाधिकारी दक्षिण शहडोल एवं उपवनमण्डलाधिकारी जैतपुर की उपस्थिति में पशुचिकित्सकों के दल द्वारा एस.ओ.पी.के तहत बाघ के शव का परीक्षण (पोस्टमार्टेम) किया गया एवं शव परीक्षण उपरान्त शवदाह किया गया, इसके तत्काल बाद हरकत में आया वनविभाग का अमला एस.ओ.पी. के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर बाघ के मृत्यु के कारणों का पता लगाने डाग स्क्वायड की मदद लेकर आरोपियों की पताशजी (तलाश) शुरू की गई। सर्चिंग के दौरान आश्चर्यजनक तथ्य सामने आए जिसमें पता चला कि बाघ की मृत्यु का असल कारण पीछे 11 व्यक्ति हैं जिन्हें घर दबोचा गया पकड़े गए संदिग्ध आरोपियो ने बड़ी चालाकी से घटनाक्रम को अंजाम दिया। बहरहाल पकड़े गए सभी 11 आरोपियों ने वैज्ञानिक तरीके की पूछतांछ उपरांत बाघ के शिकार वाली घटना को कबूल कर लिया है।

मामले में आरोपियों द्वारा यह भी बताया गया कि बाघ को सबसे पहले हम लोगों ने मिलकर बिजली करन्ट से फंसाकर मारकर जंगल में फेॅक दिया था। उनकी निशानदेही पर शिकार में प्रयुक्त कटिया फसाने का बांस, जी.आई.तार, बांस की खूटी, कांच की शीशी, बाघ के मूछ के बाल, मृत बाघ को हटाने में प्रयुक्त सांगा (साल की
बल्ली) तथा पुराने शिकार किये हुये जंगली सुअर के दांत बरामद किये गये। आरोपियों की निशानदेही पर घटना स्थल की शिनाख्त कराई गई। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्द कर प्रकरण को विवेचना में लिया गया।

मामले में गिरफ्तार आरोपियो में केमला पिता सावी आंनद कुमार सिंह पिता महगू, विनोद पिता कासी सिंह, लालसिंह पिता कासी, डीलन “
बानी, राजू सिंह पिता माघो, सुशील सिंह पिता शंकर सिंह, सभी निवासी ग्राम लफदा एंव राचरण पिता रेरा , रामदास सिंह पिता रेरा, रामखेलावन पिता बीरवल सभी निवासी दुधरिया तथा जीतेन्द्र सिंह पिता जगदीश सिंह निवासी ग्राम
घोरवे इत्यादि रहे।

बहरहाल बाघ के शिकार म मामले में सफलता पूर्वक कुशल नेतृत्व एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के जरिए विशेष संरक्षित वन्य प्राणी बाघ का शिकार मामले का आरोपियों को सलाखों के पीछे ढकेल दिया है इस कार्यवाही में बादशाह रावत वनमण्डलाधिकारी जैतपुर, राहुल सिह सिकरवार वनपरिक्षेत्र अधिकारी जैतपुर, हेमन्त प्रजापति वनपरिक्षेत्र अधिकारी गोहपारू, अंकुर तिवारी वनपरिक्षेत्र अधिकारी केशवाही, कमला प्रसाद वर्मों परिक्षेत्र सहायक बुढ़ार, पराग सिंह धुर्व परिक्षेत्र सहायक नेमुहा, बैसाखू कोल उप वन क्षेत्रपाल, अन्नपूर्णा चौधरी परिक्षेत्र सहायक देवरी, नारेन्द्र कुमार बाथम परिक्षेत्र सहायक चुहिरी, कमल प्रसाद पयासा डॉ. हेण्डलर, राजकुमार त्रिपाठी सहायक डाग हेण्डलर एवं वनपरिक्षित्र जैतपुर, गोहपारू इत्यादि एवं केशवाही के समस्त स्टाफ की बाघ शिकार मामले में उक्त 11 आरोपियों की गिरफ्तारी मामले में अभूतपूर्व योगदान रहा एवं महत्वपूर्ण उल्लेखनीय भूमिका रही।


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