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मानव भक्ति रूपी नौका का आश्रय लेकर, संसार रूपी भवसागर से पार उतर जाता है- आचार्य कौशलेन्द्र

संवाददाता/अरुण पाण्डेय (गुरूजी) दैनिक समाज जागरण

घोरावल/ सोनभद्र। सिद्धि गांव में आयोजित 9 दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत
महापुराण कथा के आठवें दिन बृहस्पतिववार को सुबह विधि विधान से मुख्य यज्ञाचार्य पं. श्रीनिवास शुक्ला के नेतृत्व में कलश विसर्जन किया गया और आचार्यों द्वारा पूर्णाहुति दी गई। सुबह 6 बजे से 9 बजे तक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की।
कथा के पूर्व यजमान पं. हरीराम मिश्रा ने व्यास पीठ की पूजा आरती किया। वृंदावन से आए मुख्य कथावाचक आचार्य कौशलेंद्र त्रिपाठी ने श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन एवं विश्लेषण करते हुए सुदामा एवं कृष्ण की मित्रता और तक्षक नाग द्वारा महाराजा परीक्षित को डसने का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित के जीवन के केवल सात ही दिन बचे थे। उन्होनें भगवत स्वरूप श्रीमद्भागवत का श्रवण कर अपने जीवन को सांसारिक बंधनों से मुक्त किया। श्रीमद्भागवत की कथा व्यक्ति के सम्पूर्ण मनोरथ को परिपूर्ण कराकर भगवत सायुज्य को प्राप्त कराती है। सातवें दिन तक्षक नाग नें परीक्षित को डसा और उनको मुक्ति हुई वे भगवान के परमधाम को प्राप्त हुए। व्यक्ति जब देह गेह से मिलता है तो अशक्त बनता है।वैरागी संतो से मिलकर विरक्त बनता है। वही जीव जब श्रीमद्भागवत का आश्रय लेता है तो भक्त बनता है। भगवान को सबसे प्रिय भक्ति ही है। मानव भक्ति रूपी नौका का आश्रय लेकर संसार रूपी रूपी भव सागर से पार उतर जाता है। भगवान की भक्ति का आश्रय लेकर ही विपन्न सुदामा जो एक एक कण के लिए मोहताज थे।प्रभु ने उनके चरणों में दुनिया की सारी संपत्ति अर्पित कर दी। कथा के अंत में हुए भजनों के दौरान श्रोता आनंदित हो गए। इस मौके पर विनोद त्रिपाठी, विंध्यवासिनी देवी, शिव कुमार मिश्र, कृष्ण कुमार मिश्र, मिथिलेश मिश्र, कमलेश मिश्र, रामानंद पांडेय, रमेश राम पांडेय, रवि प्रकाश, जगदीश शुक्ला, उमेश, भास्कर इत्यादि मौजूद रहे।


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