अधिकारी अत्याचार पीड़ितो के दर्द को समझें- एडीजीपी
समाज जागरण
शहडोल कमिश्नर शहडोल संभाग बीएस जामोद ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति वर्ग के अत्याचार पीड़ितो के प्रकरणों के निराकरण अति संवेदलशलता के साथ करें। कमिश्नर ने कहा है कि अत्याचार पीड़ितों को राहत राशि यात्रा भत्ता, उनके प्रकरणों में गवाही देने वाले लोगों को यात्रा भत्ता, भोजन व्यय, एवं मजदूरी आदि का भुगतान नियमानुसार संवेदनशीलता के साथ मुहैया कराएं। कमिश्नर ने यह भी निर्देश दिए है कि अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अनुश्रवण समितियों की बैठकें जिला स्तर पर भी आयोजित करें तथा इसकी सतत मानीटरिंग करें। उन्होनें यह भी निर्देश दिए हैं कि अनुश्रवण समितियों की बैठकें पूरी तैयारी के साथ हों बैठकों की शिर्फ रस्मअदायगी न हो कमिश्नर ने निर्देश दिए है कि अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में पीड़ित पक्षों को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए यह सभी अधिकारी सुनिश्चित करें। बैठक में कमिश्नर ने यह भी निर्देश दिए कि संभाग स्तर पर होने वाली अनुश्रवण समिति की बैठक में सभी अधिकारी तैयारी के साथ आएं तथा समुचित जानकारी के साथ आएं। कमिश्नर शहडोल संभाग आज अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की अनुश्रवण समिति के बैठक में अधिकारियों केा निर्देशित कर रहे थे। बैठक में कमिश्नर ने अत्याचार पीड़ितों को आर्थिक सहायता, गवाहों एवं आश्रितो को यात्रा भत्ता, परिवहन आहार, एवं भरण पोषण व्यय, मासिक निर्वाह भत्ता रोजगार एवं स्वरोजगार बच्चो की शिक्षा सामाजिक पुर्नवास पुलिस थानो में दर्ज प्रकरणों की समीक्षा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए एडीजीपी शहडोल जोन श्री डीसी सागर ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में प्रकरण दर्ज होते ही कार्यवाही करना सुनिश्चित करे। उन्होने कहा कि ऐसे प्रकरणों में थाना स्तर पर विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होनें दो माह बाद भी प्रकरण में चालन प्रस्तुत नहीं होने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की तथा कहा कि पुनरावृत्ति फिर कभी नहीं होनी चाहिए। एडीजीपी ने कहा कि कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, सहायक अयुक्त आदिवासी विकास, लोक अभियोजन अधिकारी के बीच समन्वय होना चाहिए। तभी हम अत्याचार पीड़ितों को न्याय दिला सकते हैं और अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लेागो पर अत्याचार करने वाले लेागों को सजा दिला सकते हैं। उन्होने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनूसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के प्रति हो रहे अत्याचार को रोकने हम सब को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की जरूरत है।बैठक में पुलिस उप महानिरीक्षक सुश्री सविता सुहाने ने कहा कि अनूसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के अपराधिक प्रकरण में पुलिस के अधिकारियों को डिटेल जानकारी होनी चाहिए। प्रकरणों की जानकारी पुलिस अधीक्षक स्तर भी होनी चाहिए। उन्होने कहा कि जाति प्रमाण पत्र के अभाव में कई बार प्रकरण विलम्ब होता है, इस पर कलेक्टर को ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि अनूसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के अत्याचार पीडितों की गवाही हेतु आने वाले लोगों को यात्रा भत्ता, भोजन व्यय एवं मजदूरी का भुगतान किया जाता है। इसकी हर थाने में विधिवत जानकारी संधारित होनी चाहिए। बैठक में परिलिक्षित क्षेत्रों पर भी चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर शहडोल श्री तरूण भटनागर, कलेक्टर अनूपपुर श्री आशीष वशिष्ट, कलेक्टर उमरिया श्री धरणेन्द्र कुमार जैन, पुलिस अधीक्षक शहडोल श्री कुमार प्रतीक, पुलिस अधीक्षक अनूपपुर जितेन्द्र सिंह पवार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमरिया प्रतिपाल सिंह महोबिया, संयुक्त आयुक्त विकास मगन सिंह कनेश, उपायुक्त राजस्व श्रीमती निमिषा पाण्डेय, उपायुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्रीमती ऊषा सिंह, सहायक अयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्री आनन्द राय सिन्हा एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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