आशु खरवार दैनिक समाज जागरण संवाददात बलिया
लोक आस्था का महापर्व छ्ठ आज उगते हुए सूर्य को अर्घ देकर समाप्त हुआ नहाए खाए से शुरु होता है यह पर्व उगते हुए सूर्य को अर्घ देकर समाप्त होता है देखे कुछ
छ्ठ पूजा को लेकर लोगों में काफी आस्था यही वजह है कि रसड़ा के लोग पूरे दुनिया में कहीं भी हो छ्ठ पूजा अवश्य ही करते है छ्ठ पूजा को लेकर खास तैयारी भी करते हैं लेकिन यह छ्ठ व्रत काफी कठिन होता है छ्ठ व्रत रखने वाले महिलाए निर्जल व्रत रहती है उगते हुए सूर्य को अर्घ देकर छ्ठ पर्व की समाप्ति होती है सुबह के 3:00 से ही महिलाएं छ्ठ घाट पर पहुंचकर सूर्य देव के उगने की प्रतीक्षा कर रही थी वही दीप जलाकर छ्ठ पूजा कर रही थी जैसे ही सुबह की 6:00 बजे सूर्य देव का दर्शन हुआ तो नदी तालाब में महिलाओ से भर गया महिलाओं ने उगते हुए सूर्य को प्रणाम करते हुए अर्घ देखकर छ्ठ पर्व को सनाप्त की सुबह डीजे पर भक्ति गाना और छ्ठ गीत सुनाई देने लगा वही छ्ठ पूजा में लोग इतने विलीन हो गए की सर पर फल की टोकरी पूजा की समान लेकर छ्ठ घाट पर सुबह पहुंचे और छ्ठ पूजा करने लगे जैसे ही सुबह सूर्य देव बाहर निकले लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई क्योंकि छठ पर्व तभी समाप्त होता है जब सूर्य देव दर्शन देते हैं और सूर्य देव को अर्घ दिया जाता है
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