कोतमा नगर पालिका में जवाबदारी ही कर रहे भ्रष्टाचार और सरकारी धन का दुरुपयोग
समाज जागरण
विजय तिवारी
अनूपपुर
वर्तमान में अनूपपुर जिले के कोतमा नगर पालिका अपने विवादित भ्रष्टाचार से परिपूर्ण कार्यों के साथ जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदारो के अमर्यादित बोल के कारण सुर्खियां बटोर रहा है यहां पर सरकारी धन का किस तरह दुरुपयोग किया जा रहा है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण लगभग 24 लाख की बनी नाली को लिया जा सकता है।
कोतमा नगरपालिका के द्वारा वार्ड नंबर नौ में लगभग 24 लाख की लागत से सड़क के किनारे जल निकासी हेतु बनाई गई नाली में कितना गुणवत्ता पूर्ण कार्य हुआ और इसके भ्रष्टाचार में किन-किन लोगों ने डुबकी लगाई यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन इस नाली को देखने के बाद जो सबसे बड़ा सवाल
खड़ा होता है वह यही है कि इस नाली की यहां पर जरूरत क्या थी लगभग 800 मीटर की दूरी वाली इस नाली में गिनती के कुल 5 मकान है और आश्चर्य की बात यह है कि इन मकानों से नाली की ऊंचाई लगभग 5 फुट से ज्यादा है और कहीं-कहीं तो यह ऊंचाई 7 फीट और 8 फीट तक जाती दिख रही है सच यही है की नाली बनने के बावजूद ना तो सड़क का पानी नाली में आया ना किसी घरों का इसके बाद अगर जनता में सवाल उठ रहा है तो जायज है और यहां के जिम्मेदार मुख्य नगर पालिका अधिकारी कोतमा नगरपालिका के अध्यक्ष और पीसीसी कमेटी के वह सभी सदस्य जिन्हें नाली के प्रस्ताव को पास किया और नाली के एस्टीमेट बनाने वाले इंजीनियर के पास क्या इस बात का जवाब है कि इस नाली की जरूरत क्या थी जहां पर सड़क के दोनों तरफ खेत हो मकान नहीं बने हुए हो वहां पर इस तरह की नाली बनाया जाना सरकारी धन का दुरुपयोग ही कहा जा सकता है या यह भी कहा जा सकता है कि जिम्मेदारों के द्वारा 24 लाख की नाली नगर की सीमा के एक कोने में ऐसी जगह बनाई गई जहां पर किसी की नजर नहीं गई
और इसके पीछे नगर पालिका के जिम्मेदारों का मुख्य उद्देश्य केवल केवल भ्रष्टाचार था।
गया राम से शुरू आया राम पर खत्म
वैसे देखा जाए तो कोतमा नगर पालिका की नई सरकार के गठन की नीव ही गया राम से हुई थी जब भाजपा का एक पार्षद कांग्रेस में चला गया और इस समय इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही थी कि यह सब कुछ भ्रष्टाचार का खुला हां खेल करने के लिए किया जा रहा है लेकिन 2 साल भी नहीं बीते की गया राम की कहानी आया राम में बदल गई और अध्यक्ष उपाध्यक्ष सहित कांग्रेस के अधिकतर पार्षद भाजपामें चले आए यही मुख्य कारण है कि वर्तमान में यहां पर अब भाजपा के मूल विचारधारा वाले पार्षदों और कांग्रेसी विचारधारा के पार्षद अध्यक्ष उपाध्यक्ष अब जो भाजपाई हो गए हैं उनके बीच टकराव इस तरह बढ़ गई है कि अध्यक्ष तक के अब मर्यादित बोल सोशल मीडिया में गूंजने लगे स भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले के बाप तक पहुंचे अध्यक्ष को अपने भाई का भ्रष्टाचार नजर कब आएगा क्योंकि उन्होंने तो पार्षद के पिता के अध्यक्ष की कार्यकाल की जांच की बात तो कर दी लेकिन शायद वह भूल गए कि उनके भाई के कार्यकाल में भी बहुत सारे कार्य ऐसे हुए थे जिसमें जनता के द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप लगे थेस वैसे कोतमा की जनता इस बात का भी इंतजार कर रही है कि भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद अब जिस तरह से अब मर्यादित आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ है वह कोतमा की राजनीति किस मोड़ पर आकर खत्म होगी।
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