मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाकपा-माले शिष्ट मंडल को उक्त मामले पर उन्होंने विचार करने का दिया आश्वासन
पटना ।
बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक नियमावली 2023 में परीक्षा के प्रावधान को लेकर विरोध कर रहे शिक्षक संगठनों और सातवें चरण के शिक्षक अभ्यर्थियों तथा विश्वविद्यालयों में कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों को अचानक हटाए जाने के मसले पर भाकपा-माले का एक प्रतिनिधिमंडल आज मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार से मिला. प्रतिनिधि मंडल में माले विधायक
संदीप सौरभ और गोपाल रविदास शामिल थे।
मुलाकात के बाद संदीप सौरभ ने कहा कि उपर्युक्त मसलों पर मुख्यमंत्री महोदय को विस्तार से एक ज्ञापन भी सौंपा गया,जिसपर उन्होंने विचार करने का आश्वासन दिया है.
संदीप सौरभ ने कहा कि हमने मुख्यमंत्री से कहा कि 10 अप्रैल 2023 को बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक नियमावली-2023 पारित कर वर्षों से कार्यरत नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने का फैसला ऐतिहासिक व स्वागतयोग्य कदम है, परंतु इस नियमावली में राज्यकर्मी का दर्जा देने की शर्त के रूप में परीक्षा आयोजित करने की बात से बिहार के लाखों नियोजित शिक्षकों में हताशा व आशंका को पैदा किया है. इससे यह संदेश जा रहा है कि ये शिक्षक ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा’ देने
के योग्य नहीं थे. हमने उनसे कहा कि सभी नियोजित शिक्षकों को महागठबंधन के 2020 के घोषणापत्र के मुताबिक राज्यकर्मी का सीधे दर्जा दिया जाना चाहिए निश्चित तौर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की जरूरत है. इस संबंध में भी भाकपा माले विधायक ने
मुख्यमंत्री को कई सुझाव दिए. माले विधायकों ने यह भी कहा कि सातवें चरण के शिक्षक अभ्यर्थी लंबे समय से अपनी बहाली का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन अब उनके ऊपर भी एक और परीक्षा लाद दी गई है. सरकार को इसपर भी विचार करना चाहिए और सातवें चरण को इस प्रक्रिया से मुक्त रखा जाना चाहिए.
अपनी तीसरी मांग में माले विधायकों ने कहा कि विश्वविद्यालयों में कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यपकों को अचानक हटाने के फैसले पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए. अचानक हटाने की प्रक्रिया उचित नहीं है और इसपर रोक लगनी चाहिए.
विदित हो कि विश्वविद्यालयों में अभी स्थायी सहायक प्राध्यपाक की बहाली हो रही है, जिन विषयों में बहाली हो चुकी है उसमें कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों को हटा दिया गया है, जबकि ये अतिथि शिक्षक प्राध्यापक लंबे समय से विश्वविद्यालयों में कार्यरत रहे हैं और कोरोना काल से लेकर अबतक शिक्षा को संभालने में उनकी प्रमुख भूमिका रही है।
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