समजा जागरण डेस्क
नई दिल्ली।। जदयू ने वक्फ बोर्ड बिल को समर्थन दिया तो उनके अपने ही मुस्लिम नेता नाराज होकर पार्टी छोड़ रहे है। हालांकि जो भी इस्तीफा अब तक हुआ है उसमे से कोई भी जदयू के बड़े मुस्लिम नेता नही है। यह भी कहा जा रहा है कि जहाँ एक तरफ छोटे मुस्लिम नेता के पार्टी को छोड़ रहे है वही बड़े मुस्लिम नेता अभी भी जदयू से बंधे हुए है।

विधानसभा चुनाव से पहले सीएम नीतीश कुमार की पार्टी झटका लगा है। जनता दल यूनाईटेड का रूख विधेयक में पक्ष में होने के कारण पार्टी के मुस्लिल नेता नाराज हो गए हैं। एक-एक कर अब तक चार नेताओं ने पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया। इनमें अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मो. शाहनवाज मलिक, प्रदेश महासचिव मो. तबरेज सिद्दीकी अलीग, भोजपुर से पार्टी सदस्य मो. दिलशान राईन और जदयू के पूर्वी चंपारण जिला चिकित्सा प्रकोष्ठ का प्रवक्ता कासिम अंसारी ने इस्तीफा दे दिया। इन नेताओं ने वक्फ संशोधन विधेयक पर जदयू के रूख को लेकर नाराजगी जताई है। कहा कि पार्टी ने लाखों मुसलमानों का भरोसा तोड़ दिया है।
इसको लेकर अब केंद्रीय मंत्री और जेडीयू सांसद राजीव रंजन (ललन) सिंह ने कहा, है कि “…जिस नेता ने पार्टी (जेडीयू) से इस्तीफा दे दिया है, उसने पतंग (एआईएमआईएम) के चुनाव चिन्ह पर ढाका (बिहार) से 2020 का चुनाव लड़ा और 499 वोट हासिल किए। चैनल इसी को बड़े नेता बताकर प्रचार कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री और जेडीयू सांसद राजीव रंजन (ललन) सिंह ने कहा है कि आरजेडी को लालू यादव के 2010 के भाषण पर बोलना चाहिए, जब उन्होंने कहा था कि (वक्फ) डाक बंगले के पास की जमीन सहित सब कुछ लूट लिया है…” इसे पर कड़े कानून बनाने की जरूरत है। लेकिन आरजेडी शायद इस बात को भूल गई है।
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