पूजा पंडालों में शोभायमान हो रही दुर्गा की प्रतिमाएं तो मंच पर हो रही सांस्कृतिक कार्यक्रम
समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश
पटना/ जिले के सभी इलाको में दशहरा पर्व को लेकर धूम नची हुई है। एक ओर पूजा पंडालों में देवी दुर्गा की प्रतिमाएं अलग अलग रूपो में शोभायमान हो रही है तो दूसरी ओर आयोजको की ओर से मंचो पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार पटना जिले के विभिन्न इलाके में दशहरा का शुभारंभ होते ही भक्तों के बीच उल्लास देखी जा रही है। दशहरा की आरम्भ से ही नवरात्रि की शुरुआत की गई थी। जिसके दौरान भक्तों के गगरो से लेकर देवी मंदिरों में अलग अलग दिन देवी की अलग अलग रूपो की पूजा की गई। इसी बीच सप्तमी तिथि को इलाके के विभिन्न पूजा पंडालों में स्थापित देवी दुर्गा की प्रतिमाओं का पट पूरे बिधि विधानों तथा पंडितों के मंत्रोच्चारण के साथ खोली गई। पट खुलते ही देवी दुर्गा की जयकारों से इलाका गुंजयमान हो उठी। भक्ति गीतों से पूरा इलाका भक्तिमय हो गया। भक्तों तथा श्रद्धालुओ की भीड़ देवी दर्शन को लेकर पंडालों में उमड़ने लगी। पूजा पंडालों के आसपास का दृश्य मेले जैसा दिखाई देने लगा। इसी बीच नवमी तिथि को भक्तों के द्वारा की गई हवन पूजा के बाद नवरात्रि का समापन किया गया। वही दशहरा की समापन दशमी तिथि को होगी। इस दिन पटना के गांधी मैदान सहित कई शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में भी लंका दहन का आयोजन किया जाएगा। इसको लेकर पालीगंज अनुमंडल के सिगोड़ी तथा जरखा गांव में भी लहजा दहन की तैयारी की गई है। इस तिथि को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। कार्यक्रमो को सफल संचालन कराने को लेकर विशेष दिशा निर्देश देते हुए प्रशासन की ओर से तैयारी की गई है। अप्रिय घटनाओं से निपटने के लिए सभी पूजा पंडालों में मजिस्ट्रेट के साथ शुरक्षा कर्मियों कि नियुक्ति की गई है। जो हर गतिविधियों पर नजर रख रहे है। जबकि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पूजा स्थलों तथा कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया जा रहा है। सभी पुलिसकर्मी पुलिस वाहनों के साथ सड़को पर पेट्रोलिंग करते नजर आए। इसी कड़ी में पटना जिले के पालीगंज अनुमंडल अंतर्गत पियरपुरा थाना क्षेत्र के गौसगंज बाजार में अष्टमी तिथि की देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सम्बंध में आयोजक मंडली के अध्यक्ष सहजानन्द प्रसाद ने बताया कि यह कार्यक्रम नवमी तथा दशमी तिथि तक चलेगी।
पर्व में सांस्कृतिक कार्यक्रमो का महत्व पर्व जीवन मे खुशियां लेकर आती है। जिसमे लीन होंने से कुछ समय के लिए जीवन मे घटित अप्रिय घटनाओं की यादाश्त कमजोर हो जाती है। मन मे धार्मिक भावनाओं को उतपन्न हो जाने के कारण देवी देवताओं पर विश्वास तथा आस्था होने से लोगो को सुकून मिलता है। जबकि पूजा पर्व में सांस्कृतिक कार्यक्रमो को अभिन्न अंग माना जाता है। क्योकि पूजा पर्व के अवसर पर यह खुशियां में चार चांद लगा देती है।
क्या है दुर्गा पूजा तथा विजयादशमी
हिन्दू धर्मग्रन्थो के अनुसार प्राचीन समय में महिषासुर नामक बलशाली दानव हुआ करता था। जो ऋषि मुनियों सहित आमजनों को जस्फी सताया करता था। उससे सभी देवी देवता भी त्राहिमाम कर रहा था। उसपर विजय पाना त्रिदेवो तथा त्रिदेवियों के भी बस की बात नही रही। अंततः सभी ने आपसी निर्णय तथा सहयोग से अपनी अपनी शक्तियां प्रदान कर एक सुंदर नारी को जन्म दिया। जो देवी दुर्गा के रूप में प्रसिद्ध हुई। देवी दुर्गा की सुंदरता के बारे में जानकारी पाकर महिषासुर बलपूर्वक दुर्गा से विवाह करना चाहा। जिसको लेकर दोनों के बीच युद्ध हुआ। जिसमें देवी दुर्गा ने नवमी तिथि को महिषासुर का बध कर विजय प्राप्त की तथा उसके आतंक से सभी को मुक्ति दिलाई। तब से देवी दुर्गा की पूजा नवमी तिथि को धूमधाम से मनाई जाती है। वही हिंदुओ का पवित्र धर्मग्रन्थ रामायण के अनुसार प्राचीन समय मे लंका का राजा रावण शंकर से आशीर्वाद प्राप्त कर स्वर्ग विजेता बन गया था। जिसका आतंक पृथ्वी तथा स्वर्ग में व्याप्त था। अधिक महत्वाकांक्षी तथा बलशाली होने के कारण उसपर विजय प्राप्त करना देवताओं तथा आम जनों के बश की बात नही रही। यह देख रावण के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए देवी देवताओं तथा ऋषि मुनियों ने विष्णु से प्रार्थना किया। जिससे प्रभावित होकर विष्णु ने पृथ्वी पर राम के रूप में अवतार लिया। वही राम ने दशमी तिथि को ही लंकापति अत्याचारी तथा स्वर्ग विजेता दानव रावण का बध कर उसके आतंक से सभी को मुक्ति दिलाया था। तब से विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। इसीलिए दुर्गा पूजा का महत्व दशहरा से अलग है।