साल में केवल एक बार दशहरे पर ही खुलता है रावण का मंदिर
- कानपुर में 134 साल पहले 1890 में महाराज जयप्रकाश शुक्ला ने प्रयाग नारायण शिवाला में कराया था रावण मंदिर का निर्माण
सुनील बाजपेई
कानपुर। असत्य पर सत्य की जीत के लिए मनाये जाने वाले दशहरे पर शिवाला स्थित मंदिर में आज दशहरे को रावण की पूजा की जाएगी ,जिसमें सैकड़ो लोग भाग लेंगे
यहां सिर्फ दशहरे के दिन साल में एक बार इस रावण मंदिर का पट खोला जाता है। इस मंदिर का नाम दशानन मंदिर है और इसका निर्माण 1890 में हुआ था।
इसके लिए आज दशहरे को सुबह से ही दशानन मंदिर के साफ सफाई और श्रृंगार पूजन के बाद भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा। भक्तों ने लंकापति रावण के दर्शन कर सुख समृद्धि और परिवार कल्याण की कामना करेंगे। साल में केवल एक बार दशहरे के दिन मंदिर खुलने के कारण सुबह से ही मंदिर को बाहर भक्तों की भीड़ एकत्र होती है। यहां बारी बारी भक्तों ने लंकापति को प्रसाद और पुष्प अर्पित किया जाता है। भक्तों द्वारा रावण की आरती उतारी जाती है।
इस बारे में भक्तों में मान्यता है कि लंकापति के दर्शन करने से परिवार और बच्चों का कल्याण होता है। आज दशहरे वाले दिन संध्याकाल में रावण के पुतला दहन के पहले इस मंदिर के दरवाजे एक साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे हैं। इस मंदिर का निर्माण करीब 134 साल पहले महाराज गुरू प्रसाद शुक्ल ने कराया था।
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