समाज जागरण रंजीत तिवारी
वाराणसी।।
शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि अनुभवों से भी सीखी जाती है। इसी सोच के साथ अवादा फाउंडेशन ने 18 मार्च से 20 मार्च तक सोनभद्र जिले के आदिवासी क्षेत्रों के चिचलिक, खोड़ेला, पनौरा, बड़ेला और महुली के कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों एवं इंटर्नस के लिए ऐतिहासिक और शैक्षिक नगरी प्रयागराज में तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया।
इतिहास, संस्कृति और शिक्षा का संगम
अवादा फाउंडेशन के डायरेक्टर रितु पटवारी ने बताया इस शैक्षिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने प्रयागराज के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और शैक्षणिक स्थलों का अवलोकन किया। उन्होंने आजाद पार्क का दौरा किया, जहां उन्होंने महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में इस स्थल की भूमिका को करीब से जाना। इसके बाद, आनंद भवन में विद्यार्थियों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को समझा और नेहरू परिवार के योगदान से परिचित हुए।
न्यायिक और कृषि शिक्षा का गहन अध्ययन
विद्यार्थियों ने प्रयागराज उच्च न्यायालय का भ्रमण कर न्यायिक प्रणाली की बारीकियों को समझा और लोकतांत्रिक मूल्यों की महत्ता को जाना। इसके बाद, सैम हिगिनबॉटम कृषि एवं विज्ञान विश्वविद्यालय में जाकर उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों, बागवानी और फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) से जुड़ी नवीनतम जानकारियां प्राप्त कीं। यह अनुभव उनके लिए कृषि क्षेत्र में संभावनाओं को समझने का एक सुनहरा अवसर साबित हुआ।
आध्यात्मिक अनुभव और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव
विद्यार्थियों ने प्रयागराज के प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर के दर्शन किए और आध्यात्मिकता का अनुभव किया। इसके पश्चात, उन्होंने संगम तट पर जाकर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन मिलन को देखा और भारतीय संस्कृति व परंपराओं के महत्व को समझा।
ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक यात्रा
यह तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। उन्होंने न केवल ऐतिहासिक विरासतों को नजदीक से जाना, बल्कि कृषि, न्याय और स्वतंत्रता संग्राम के विविध पहलुओं को भी समझा। यह अनुभव उनके भविष्य निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।
अवादा फाउंडेशन का यह सराहनीय प्रयास आदिवासी विद्यार्थियों को नए अवसरों से जोड़ने और उनकी शिक्षा को वास्तविक अनुभवों से समृद्ध करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।