…जहां स्वागत-विदाई में पहनाना चाहिए माला, वहां सरकारी दफ्तर में जड़ दिया ताला
मनोज कुमार
संवादाता हजारीबाग।
हजारीबाग नया समाहरणालय स्थित डीएसई आफिस में बुधवार को दिनभर हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। जैसे ही गढ़वा से ट्रांसफर होकर चार्ज देने के लिए नए डीएसई आकाश कुमार आए, पूर्व डीएसई संतोष गुप्ता उनका स्वागत करने की जगह सरकारी दफ्तर में ताला बंद करा यह कहते हुए निकल गए कि चार दिनों के बाद प्रभार देंगे। प्रभार लेने और योगदान देने हजारीबाग आए नए डीएसई आकाश कुमार ने सरकारी आदेश का हवाला दे आज ही प्रभार सौंपने को कहा। लेकिन पूर्व डीएसई संतोष गुप्ता निकल वहां से चलते बने। कोई चारा नहीं देख आकाश कुमार डीइओ प्रवीण रंजन के पास गए। फिर डीसी से मिला स्वत: प्रभार ग्रहण करने की अनुमति मांगी। इस बीच संतोष गुप्ता कोई रजिस्टर लेने आए और जैसे ही दफ्तर का ताला खुलवाया, ने डीएसई ने चार्ज एज्युम कर लिया। फिर क्या था, पूर्व डीएसई को कुछ नहीं सूझा, तो शिक्षकों की काउंसिलिंग के लिए डीएसई आफिस में बेंच लगवाने लगे। सरकार के ट्रांसफर लेकर में काउंसिलिंग का जिक्र है कि डीएसई काउंसिलिंग करेंगे। ऐसे में अब काउंसिलिंग की जिम्मेवारी ने डीएसई की है, अन्यथा सरकार ने जिन शिक्षा पदाधिकारियों के तबादले का आदेश पत्र जारी किया है, उसमें काउंसिलिंग का जिक्र ही नहीं होता। इधर एज्युम चार्ज पर डीइओ ने हस्ताक्षर करने की बात कही है। ऐसे में पूर्व डीएसई संतोष गुप्ता को प्रभार लेने की मजबूरी है।आखिर ने डीएसई को चार दिनों बाद प्रभार क्यों देना चाह रहे थे संतोष गुप्ता, जानिए अंदरखाने की बात
ने डीएसई आकाश कुमार को आखिर संतोष गुप्ता प्रभार देना क्यों नहीं चाह रहे थे। इस मामले में झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मो. अतिकुज्जमा ने कहा कि दूसरे जिले से आए शिक्षकों की पोस्टिंग के लिए लाखों रकम को वसूली की गई है। अब पूर्व डीएसई पशोपेश में हैं कि जिला स्थापना समिति की बैठक नहीं होने से उन शिक्षकों को क्या जवाब देंगे। ऐसे में शिक्षकों से वसूली गई रकम लौटानी होगी। दरअसल किसी को तनिक अनुमान नहीं था कि सरकार का फरमान जारी होते ही ने डीएसई प्रभार लेने आ जाएंगे। पूर्व डीएसई को संभालने का मौका ही नहीं मिला। इन चार दिनों में डीएसई आफिस में और क्या-क्या खेल होते, कहना मुश्किल है। क्या-क्या अनियमितताएं और सबूत मिटाए जाते या फिर शिक्षकों को रकम लौटाई जाती। वहीं अपने चहेते पदाधिकारियों, कर्मियों और शिक्षकों के भी भविष्य की राह तलाशते। बहरहाल चार्ज नहीं देने से स्वत: ही सारे कारनामों की पोल पलभर में उजागर बीती स्पष्ट परिलक्षित होती प्रतीत हुई। आरडीडीई आफिस में भी हो चुकी है चार्ज रिज्युम की घटना
आज से करीब 20 साल पहले आरडीडीई आफिस में भी चार्ज रिज्युम की घटना है चुकी है। तब नगीना राम को लक्ष्मण सिंह चार्ज नहीं दे रहे थे। वर्ष 2003 में मजिस्ट्रेट की अगुवाई में दफ्तर का ताला तुड़वाकर नगीना राम ने स्वत: चार्ज लिया था।
पोस्टिंग के लिए रकम देनेवाले शिक्षक पशोपेश में, बुरे फंसे बिचौलिए ।दूसरे जिले से ट्रांसफर हैकर आए 93 में वह सभी शिक्षक सकते में हैं, जिन्होंने बिचौलियों के माध्यम से मनचाही पोस्टिंग के लिए लाख-सवा लाख तक खर्च किए हैं। उनकी पोस्टिंग पूर्व डीएसई संतोष गुप्ता के माध्यम से होनी थी। लेकिन अब ने डीएसई के आ जाने से पुराने डीएसई के तुरूप का पत्ता बदल गया। ऐसे़ में शिक्षक यह पशोपेश में हैं कि इतनी राशि खर्च कर मनचाहे स्कूलों में पोस्टिंग मिलेगी या नहीं। वहीं बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले कुछ बीइइओ, क्लर्क, कंप्यूटर आपरेटर, सरकारी व पारा शिक्षक सकते में हैं कि पूर्व डीएसई संतैष गुप्ता की पिंड तो छूट गई, शिक्षकों के कोप भाजन का शिकार तै अब बिचौलिए ही बनेंगे। चूंकि स्थापना में पूर्व डीएसई की सूची बदलनी तय है। दरअसल इस वसूली मामले की शिकायत डीएसई से लेकर शिक्षा सचिव व मुख्यमंत्री तक हो चुकी है। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि इसी वजह से शनिवार को जिला शिक्षा स्थापना समिति की बैठक टाल दी गई और पूरे कार्यकाल में सर्वाधिक विवादित रहनेवाले पूर्व डीएसई संतोष गुप्ता अपनी ही कारस्तानी के चक्रव्यूह में फंस गए।
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