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जाना तुम्हारे प्यार मे…….. जोकर बना दिया !

समाज जागरण

70 की दशक में एक फिल्म आया जिसका नाम था मेरा नाम जोकर। मै आज हैरान होता हूँ कि आकिर लेखक और शायर कितने दुरदर्शी होते है कैसे उनको यह पता होता है कि आने वाले समय में हास्य के रूप में जाना-जाने वाले जोकड़ भारत में आम लोगों के जीवन शैली बन जायेगा। गाना भी तो आपको याद होगा । मेरा जुता है जापानी, मेरा पतलुन इंग्लिस्तानी, सर पे लाल टोपी फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी। ऐसा लगता है जैेसे की मानव सभ्यता अब जोकरों के रूप ले लिया है।

विकासवाद की बढती होड़ नें हमे जोकर बना दिया है। राम कृष्ण स्वामी विवेकानंद के देश में कई दिनों से जोकरो की भरमार है। सबसे बड़ी बात की हमारे बच्चों को जोकर बनाने वाले कोई और नही बल्कि शिक्षण संस्थान है। किसी भी देश के लिए उसका सभ्यता संस्कृति उसका प्राण है। उसके आत्मा है। ये शिक्षण संस्थाने कुछ चंद पैसो के लिए बच्चों को जोकर बना रहे है और हम लोग तीन अपने ही घर में अपने बच्चों को जोकर बनता देख खुशी से फुले नही समा रहे है।

तब यह गीत याद आता है , जाना तुम्हारे प्यार में शैतान बना दिया, क्या क्या न बनना चाहा था हैवान बना दिया। आज हमने अपने बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा के माध्यम से जोकर बना दिया है। आने वाला समय जोकरो का है यह कहना किसी भी प्रकार से गलत नही होगा। आज हर कोई जोकर बनकर समाजिक व्यवस्था को बिगाड़ने में लगा है। मानव जीवन के महत्व को समझने के बजाय अपने जीवन के जोकरों के तरफ बना लिया है। फिल्म डार्क नाइट में इस चरित्र का बखूबी चरितार्थ किया गया है ।

जोकर एक काल्पनिक चरित्र है, जो क्रिस्टोफर नोलन की २००८ की सुपरहीरो फिल्म द डार्क नाइट में मुख्य खलनायक के रूप में प्रदर्शित हुआ है। डीसी कॉमिक्स के इसी नाम के एक चरित्र पर आधारित जोकर का अभिनय ऑस्ट्रेलियाई अभिनेता हीथ लेजर ने किया था। जोकर एक मनोरोगी जन-हत्यारा है, जिसके पास हास्य के एक संवेदनाशील भावना है, और वह गौथम नगर को अपराध से मुक्ति दिलाने के बैटमैन (क्रिश्चियन बेल), जेम्स गॉर्डन (गैरी ओल्डमैन) और हार्वे डेंट (हारून एख्हार) के प्रयासों को कमजोर करने के अपने प्रयासों के लिए जाना जाता है। यह चरित्र अव्यवस्था, अराजकता और जुनून इत्यादि विषयों का प्रतीक है; पूरी फिल्म के दौरान वह अपराध के माध्यम से सामाजिक व्यवस्था को उथल-पुथल करते रहने की इच्छा व्यक्त करता है, और बैटमैन के साथ अपने संघर्ष से ही खुद को परिभाषित करता है।

हो सके तो अपने बच्चों को बचाइये। जोकर जो एक समय मे हास्य के दुनिया था आज अपराध के दुनिया में तब्दील हो चुका है। हमारे बच्चे इसके चंगुल में फंसते जा रहे है। हमे जरुरत है कि अपने बच्चों का राम कृष्ण और स्वामी विवेकानंद के चरित्रों से अवगत कराना ही नही बल्कि उनको जीना सीखाना होगा। अन्यथा ये पूरी दुनिया सर्कस में तब्दील होगा और देखने वाला कोई नही होगा।


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