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नही मिला अनुदान तो आमरण अनशन करेंगे अनुदानित शिक्षक : प्रोफेसर भटनागर

मांगे नही मानी गयी तो आत्मदाह करने पर विवश हो जाएंगे शिक्षक

  • सुप्रीम कोर्ट से सामूहिक इच्छा मृत्यु की मांग करेंगे भूखे शिक्षक

मधेपुरा ।

लगभग चार दशक से लालू, राबड़ी और नीतीश सरकार के झूठे आश्वासन से जीवन के अंतिम दौर में पहुंच चुके अनुदानित शिक्षक अब मरने मारने पर तैयार हो रहे हैँ। अगर सरकार बची हुई अनुदान की राशि का भुगतान कर वेतन भुगतान नही करती है तो शिक्षक पहले आमरण अनशन करेंगे और उसके बाद आत्मदाह करेंगे। उक्त बातें अनुदानित शिक्षक तथा शिक्षेक्त्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के विश्वविद्यालय अध्यक्ष प्रोफेसर मनोज भटनागर ने जारी विज्ञप्ति में कही। उन्होंने कहा की नीतीश सरकार, कुलपति तथा कुलाधिपति अनुदानित शिक्षकों के मांगों के प्रति असंवेदनशील ही नहीं बल्कि अंधा और बहरा हो गया है। इनके इसी कुकृत्व का ही नतीजा है की बिहार में उच्च शिक्षा गर्त में चला गया है। अगर सीएम, कुलपति तथा कुलाधिपति में दम है तो वे चार माह भी बिना वेतन का काम करके दिखा दें। शिक्षकों को झूठे आश्वासन देकर ठगने वाले ऐसे नेता तथा नौकरशाह उच्च शिक्षा के लिए कोढ़ के समान है। उसके मरे हुए इंसानियत को जगाने के लिए हमलोगों ने पहले आमरण अनशन उसके बाद सुप्रीम कोर्ट से सामूहिक इच्छा मृत्यु तथा अंत में आत्मदाह करके जीवन लीला को समाप्त कर लेंगे ताकि भविष्य में कोई उच्च डिग्री धारी वित्त रहित प्रबंधन और बेदर्द सरकार के चंगुल में फसकर अपने जीवन के सुनहरा चालीस साल को बर्बाद न करें।


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