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दैनिक समाज जागरण
ब्यूरो चीफ उमाकांत साह
बांका/चांदन/प्रकृति के प्रति प्रेम एवं भारतीय संस्कृति का पर्व आंवला नवमी बुधवार 2 नवंबर को जिला के चांदन प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत गांव कस्बों में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भैरोगंज बाजार के दर्जनों सुहागिन महिलाओं ने सुबह से ही देवालायों और अन्य स्थान पर एकत्र होकर व्रत-उपवास रखकर आंवले के पेड़ के तने धागा लपेट कर कपूर व घी का दीपक जलाकर पूजा अर्चना की।
इस दौरान महिलाओं ने आंवला वृक्ष के नीचे बैठकर पंडित कौशल कुमार पाण्डेय के वेद मंत्र उच्चारण द्वारा आंवले नवमी की कथा श्रवण किया। तथा परिवार के लिए आरोग्यता व सुख-समृद्धि की कामना की गई। साथ ही भक्ति भाव से महिलाओं ने आंवला वृक्ष की पूजा अर्चना की। महिलाएं घरों से थाली में पूजा की सामग्री रखकर आंवला वृक्षों की पूजा अर्चना करते हुए मंगल गीत गाती हुई पूजा अर्चना कर कथा कहानी सुनी और सुख समृद्धि की कामना की। इसके बाद आंवला वृक्ष की परिक्रमा की। इस उपलक्ष्य में पंडित कौशल कुमार पाण्डेय ने आंवला नवमी करने का महत्व विस्तार पूर्वक बताया। मान्यता है कि आंवला नवमी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु एवं शिव जी का निवास होता है। यही वजह है कि इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने की विधान है। ऐसा करने से इंसान की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। मान्यता है कि इसी दिन सतयुग का प्रारंभ हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आंवला नवमी के दिन भगवान विष्णु ने कुष्माण्डक नामक दैत्य को मारा था, और आंवला नवमी पर ही भगवान श्री कृष्ण कंस को वध करने से पहले तीन वनों की परिक्रमा की थी। वहीं महिलाओं ने वृक्ष की पूजा करने के बाद अंत मेंं सभी महिला श्रद्धालु ने वहीं पेड़ निचे प्रसाद खा कर व्रत खोला, तत्पश्चात आंवला पैड़ से लिपट कर परिवार को सुख समृद्धि की कामना की और सभी श्रद्धालु अपने अपने घरों को लौट गई।
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