पंचायती राज व्यवस्था में महिला जनप्रतिनिधियों की भूमिका नगण्य
समाज जागरण
विजय तिवारी
बिरसिंहपुर पाली — पंचायती राज अधिनियम में अमूल चूल परिवर्तन कर मध्यप्रदेश शासन ने महिलाओ को अधिकार संपन्न बना कर उन्हें उनका वाजिब हक दिलाने के लिए ग्राम पंचायतों में पचास प्रतिशत से अधिक की भागीदारी सुनिश्चित कर उनको सम्मान दिलाया । यह भागीदारी तय करने के लिए संविधान में संशोधन कर पंचायतों की आधी आबादी मानकर आधे से ज्यादा का नियमतः आरक्षण लागू किया गया। राज सरकार के इस सराहनीय कदम को देख कर अन्य राज्य सरकारों ने अनुसरण किया । इस महत्वपूर्ण फैसले के
पीछे एक सुनहरा सपना था कि समाज में पुरूषों के समान महिलाओं को भी आत्म निर्भर बनाया जा सकें । इसी सपने को साकार करने के लिए त्रिस्तरीय ग्राम पंचायतो में महिलाओ को समानता के अधिकार मिला । समानता के इस अधिकार निर्वाचन तक तो भरपूर मिला बकायदा महिलाएं चुनाव लड़ी ,चुनीं गयी, कुर्सियां सम्हाली, लेकिन ग्राम पंचायतों का हिसाब – किताब की बात जब आयीं तो कहीं पर उनके पति -देवर और पुत्रो ने बागडोर सम्हाली । यही से महिला सरपंचों या अन्य जनप्रतिनिधियो के अधिकारों का हनन शुरू होता है । कहने – सुनने और देखने में जो आ रहा है कि आज भी महिला सरपंच है,लेकिन पंचायतों की पूरी कमान उनके पति पूत्रों व परिजनों के हाथों मे है । बताया तो यह भी जाता है कि अधिकांश महिला सरपंचों के परिजन बकायदा पंचायतों की बैठकों में भाग लेते हैं, और हस्ताक्षर भी उनके पति करने से परहेज़ नहीं करते।
पाली जनपद पंचायत में छठवीं अनुसूची लागू हैं , जहां पर 44 ग्राम पंचायते आती है जिनमें 23 ग्राम पंचायतें महिला वर्ग के लिए आरक्षित हैं, इन ग्राम पंचायतों में पद पर तो महिला सरपंच सुशोभित है,लेकिन इसकी बागडोर इनके परिजन ही सम्हाल रहे हैं ।
पाली विकास खंड से सटी ग्राम पंचायत मुदरिया है ,जहां पर सरपंच पद पर श्रीमती माया देवी आसीन हैं , लेकिन ग्राम पंचायत में सरपंच पद का दायित्व उनके पति श्री मान हरिभजन जी ही सम्हाल रहे रहे । पिछले 05 सितम्बर 24 को ग्राम पंचायत की मासिक बैठक में आदरणीय पति महोदय विराजित होकर कार्यवाही संचालित करा रहे हैं । बताया जाता है कि ग्राम पंचायत में इनकी धौंस है, जिससे की न तो ग्राम पंचायत में चुनें गये , पंचों की सुनी जाती और न ही अन्यों की । ग्राम पंचायत मुदरिया के सरपंच पति के दखल की असली तस्वीर की एक झलक है ,सच्चाई तो यह है कि अन्य सभी ग्राम पंचायतों में इसी तरह की भर्रा शाही का राज स्थापित है ।
मध्यप्रदेश शासन के व्दारा महिला सरपंचों के कार्यों में परिजनों की दखलंदाजी को रोकने के लिए विधिवत आदेश प्रसारित कर तामील दी गई है, लेकिन न तो इसका असर महिला सरपंचों के परिजनो को रत्ती भर है और न ही इस आदेश के क्रियान्वयन करने वाले अधिकारियों को शासन की मंशानुरूप महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रति सजग है । पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओ को उनका वास्तविक हक का लाभ मिल सके इसके लिए शासन को नीतिगत निर्देशों का कड़ाई से पालन करना भी होगा ।
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