माँ तुलजा-दुर्गा भवानी रामेश्वर
समाज जागरण रंजीत तिवारी
रामेश्वर वाराणसी
इतिहास- रामेश्वर तीर्थधाम में महाराष्ट्र के मराठों की कुलदेवी माँ तुलजा व साथ मे दुर्गा देवी हैं जो दुर्गम असुर को मारकर दुर्गा भवानी के रूप में चर्चित हुई।महाराष्ट्र के शोलापुर दक्षिण प्रान्त के तुलजापुर गांव की देवी रही हैं जो रामदास समर्थ की पूंजी हुई देवी हैं।समर्थ जी के शिष्य शिवाजी महाराज को भवानी ने रत्नजड़ित तलवार प्रदान किया था।ये सतयुग की देवी हैं मनोकामना को पूर्ण करने वाली देवी पंचक्रोशी में वरुणा तट पर काशी प्रवास की कामना से विराजमान है।जो दुखियो के दुखहरण कर मनोकामना को पूर्ण कर रही हैं।
आयोजन- काशी पंचक्रोशी यात्रा मार्ग के तीसरे पड़ाव धाम में शारदीय व चैत्र नवरात्र में यहां मनौती पूरी करने के लिए बृहद हवन पूजन व पाठ किया जाता है।प्रतिवर्ष चैत्र मास में देवी का श्रृंगार कर विशेष पूजन होती है।जिसमे आस पास सहित शहर व अन्य प्रांतों से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।रात्रि भर शास्त्रीय संगीत का शमा चलता है।
कैसे पहुंचे- माँ तुलजा-दुर्गा भवानी धाम में पहुंचने के लिए कैंट से सिटी बस चलती है।शहर से 16 किमी दूर होने से सीधे आटो रिक्सा से पहुंचा जा सकता है।राजातालाब-जंसा से भी आटो द्वारा पहुंच सकते हैं।दिन भर साधनों की उपलब्धता रहती है।
वास्तुकला- 18वीं शताब्दी की खास कलाकृति से परिपूर्ण रामेश्वर महादेव मंदिर परिसर में मराठा परिवार द्वारा मन्दिर बनवाया गया था। जर्जर हो जाने के बाद मंदिर प्रशासन ने सहयोग से आधुनिक ढंग की सुविधाओं से युक्त निर्माण कराया।पर्यटन विभाग ने आधुनिक विकास से सुसज्जित करा दिया है।
विशिष्टता- औरंगजेब जब रामेश्वर में हिन्दू मन्दिरो को नष्ट कर रहा था ।उस समय भवानी ने काला भौंरा बनकर उसे दौड़ा लिया। अंततः वह पुरे सैनिकों सहित भाग खड़ा हुआ।पुजारी अन्नू तिवारी के अनुसार भवानी की कृपा है कि कोई अनहोनी नही होने देती।अनहोनी की सूचना पुजारी को स्वप्न में देकर भक्तों की रक्षा करती हैं।मनोकामना को पूर्ण करती हैं जिससे हर मंगल कार्य के पूर्व यहां देवी की पूजा की जाती है जो आस्था का मंदिर बन गया है।
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