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अंतरराष्ट्रीय इस्सयोग समाज के तत्वावधान में अखंड भजन-साधना, हवन और कन्या पूजन संपन्न

पटना में 25 घंटे, दिल्ली में 12 घंटे और नोएडा में चार घंटे तक चली सामूहिक भजन-साधना, सूक्ष्म साधना पद्धति के आध्यात्मिक महत्व पर दिया गया विशेष बल**

**विनोद सिंह तकियावाला, स्वतंत्र पत्रकार**

**नई दिल्ली।** नवरात्र के पावन अवसर पर अंतरराष्ट्रीय इस्सयोग समाज के तत्वावधान में अखंड भजन-साधना, विधिवत हवन और कन्या पूजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। पटना स्थित संस्था के मुख्यालय गुरुधाम, दिल्ली केंद्र के शक्ति पीठ मां मनोकामना देवी मंदिर परिसर तथा नोएडा स्थित शक्ति उपासना स्थल पर साधकों ने सामूहिक रूप से धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक साधना में भाग लिया। इस दौरान परम पूज्य सद्गुरुदेव एवं शक्ति स्वरूपा सद्गुरुदेव मां जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए साधकों ने सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक शांति और जनकल्याण की कामना की।



### पटना, दिल्ली और नोएडा में हुई अखंड भजन-साधना

नवरात्र के अवसर पर पटना स्थित गुरुधाम में 25 घंटे तक अखंड भजन-साधना की गई। वहीं, दिल्ली केंद्र के शक्ति पीठ मां मनोकामना देवी मंदिर परिसर में 12 घंटे और नोएडा के शक्ति उपासना स्थल पर चार घंटे तक सामूहिक भजन-साधना चली। इन आयोजनों में गुरु-स्मरण, शक्ति-उपासना, ध्यान और आध्यात्मिक अनुशासन पर विशेष जोर दिया गया।

विधिवत हवन और कन्या पूजन के साथ संपन्न हुए इन अनुष्ठानों ने श्रद्धालुओं को भारतीय सनातन परंपरा, नारी शक्ति के सम्मान और आध्यात्मिक चेतना के महत्व का संदेश दिया। साधकों ने सामूहिक उपासना के माध्यम से सेवा, सद्भाव और लोककल्याण की भावना को मजबूत करने का संकल्प व्यक्त किया।

### इस्सयोग की सूक्ष्म साधना पद्धति का विशेष महत्व

अंतरराष्ट्रीय इस्सयोग समाज की साधना परंपरा में सूक्ष्म साधना को विशेष महत्व दिया जाता है। समाज की मान्यता के अनुसार, साधना की गहनता, आंतरिक एकाग्रता और लयावस्था का अनुभव बाह्य कर्मकांड से अलग एक विशिष्ट आध्यात्मिक आयाम प्रस्तुत करता है।

इस्सयोग की परंपरा में यह मान्यता व्यक्त की जाती है कि एक मिनट की लयावस्था में की गई सूक्ष्म साधना छह वर्षों की बाह्य पूजा-पाठ के बराबर फलदायी हो सकती है। यह विचार साधना पद्धति में आंतरिक एकाग्रता, आत्मानुशासन और गहन आध्यात्मिक अनुभूति के महत्व को रेखांकित करता है।

### साधना के साथ विनम्रता और अहंकार से दूरी का संदेश

समाज की साधना परंपरा में सद्गुरुदेव द्वारा साधकों को अपनी आध्यात्मिक शक्ति के प्रति सजग रहने के साथ विनम्रता बनाए रखने की प्रेरणा देने का उल्लेख किया जाता है। सद्गुरुदेव का कथन है, *“आप इस्सयोगी को अपनी शक्ति का पता नहीं है। जैसे ही आपको अपनी शक्ति का पता चलेगा, आपके अंदर अहंकार हो जाएगा।”*

इस संदेश के माध्यम से साधना के साथ आत्मसंयम, विनम्रता और अहंकार से दूर रहने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए केवल साधना ही नहीं, बल्कि अपने आचरण में सहजता, सेवा-भाव और मानवीय मूल्यों को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना गया है।

इसी आध्यात्मिक दृष्टिकोण को व्यक्त करते हुए सद्गुरुदेव ने इस्सयोग को *“एक आध्यात्मिक क्रांति—न भूतो, न भविष्यति”* कहा था। समाज की परंपरा में साधना को व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ आत्मिक अनुशासन, सद्भाव और मानवीय मूल्यों के विकास का माध्यम भी माना जाता है।

### गुरु-परंपरा के प्रति श्रद्धा और लोककल्याण का संकल्प

नवरात्र के अवसर पर पटना, दिल्ली और नोएडा में आयोजित अखंड भजन-साधना, हवन और कन्या पूजन ने गुरु-परंपरा के प्रति साधकों की श्रद्धा को अभिव्यक्त किया। सामूहिक साधना के माध्यम से श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक एकात्मता, सेवा, सद्भाव और जनकल्याण की भावना को सुदृढ़ करने का संकल्प व्यक्त किया।

इन आयोजनों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय इस्सयोग समाज की साधना परंपरा, आंतरिक अनुशासन और सूक्ष्म साधना के आध्यात्मिक महत्व का संदेश प्रसारित किया गया।


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