भारत सरकार ने इस साल जिन लोगों को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा है, उसमें मशहूर कृषि विज्ञानी एमएस स्वामीनाथन भी हैं. जिनका पिछले साल 99 साल की उम्र में निधन हो गया था. वह ऐसे शख्स थे, जिन्होंने कृषि, उपज और अनाज उत्पादन के मामले में खुशहाल भारत की नींव रखी थी. इसके बाद देखते ही देखते हमारा देश दुनिया में अनाज के मामले में चैंपियन बन गया.
वह अपने जीवन आखिर तक लगातार एक्टिव थे. अपने देश में तो उनका नाम एक तरह से कृषि का पर्याय बन चुका था. कहना चाहिए कि देश में खुशहाल कृषि की जो भी तस्वीर हम सभी के सामने है, उसे लाने वाले वही थे, जो दरअसल कृषि विज्ञानी थे लेकिन जरूरतों और समय ने उन्हें इस काम में ऐसा लगाया कि वो इसके एक्सपर्ट हो गए.
उनका पूरा नाम मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन था. देश अगर आज दुनियाभर में कृषि के मामले में सबसे शीर्ष देशों में है और ये क्षेत्र उसकी सबसे बड़ी ताकत है तो इसका श्रेय भारत के कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन को जाता है, जिन्हें भारत में हरित क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है.
स्वामीनाथन का जन्म ब्रिटिश राज में 7 अगस्त, 1925 में तमिलनाडु में हुआ. मूल रूप से वह आनुवांशिक विज्ञान के वैज्ञानिक थे लेकिन जो कृषि की ओर मुड़े और देश के सबसे प्रसिद्ध कृषि विज्ञानी की पहचान बनाई. पूरी दुनिया में उनके काम को सराहना मिली. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा उन्हें “आर्थिक पारिस्थितिकी के जनक” के रूप में संबोधित किया गया
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