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कानपुर देहात में जिंदा जलकर मां बेटी की मौत से सरकार पर हमलावर विरोधी



– सहायक जिलाधिकारी और लेखपाल समेत 25 के खिलाफ एफ आई आर, जेसीबी चालक गिरफ्तार, एस डी एम भी हिरासत

– शव रख मौके पर सीएम को बुलाने पर अड़े ग्रामीण मनाने में जुटा एडीजी समेत अधिकारियों का अमला

– मुख्य सचेतक मनोज पांडे की अगुवाई में सपा ने भेजा 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल

– घटनास्थल पर पहुंचने वाले कई नेता पुलिस हिरासत में

सुनील बाजपेई
कानपुर। मकान के रूप में कथित अतिक्रमण गिराए जाने के विरोध में बाबा के बुलडोजर ने कानपुर देहात में बवाल करा दिया। यहां बुलडोजर से मकान गिराये जाने की घटना से आहत मां बेटी ने आग लगा ली जिसके फलस्वरूप दोनों की अस्पताल पहुंचने के पहले ही मौत हो गई।इसके विरोध में जमकर बवाल हो गया। इस बीच घटनास्थल पर पहुंचने वाले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कई नेताओं को हिरासत में भी ले जाने की खबर है ।
वहीं कानपुर देहात जिले के मैथा तहसील के मड़ौली गांव में हुई इस दुखद घटना पर यूपी की योगी सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए पीड़ित परिवार की शिकायत पर एसडीएम मैथा ज्ञानेश्वर प्रसाद, लेखपाल अशोक सिंह रूरा थानेदार दिनेश गौतम, जेसीबी ड्राइवर दीपक समेत 12 नामजद और 25 से 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपी जेसीबी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, लेखपाल को भी सस्पेंड करने के साथ ही एसडीएम को भी हिरासत में लिया गया है। लेकिन इसके बाद भी ग्रामीण संतुष्ट नहीं हुए और वे मुआवजे समेत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मौके पर बुलाने की मांग पर घंटों अड़े रहे।
फिलहाल घटना में करीब 18 घंटे बाद भी अभी तक शव नहीं उठाया जा सका है। स्वजन की मांग है कि मुख्यमंत्री को गांव बुलाया जाए व जो आरोपित मुकदमे में नामजद किए जाएं उनकी गिरफ्तारी हो तभी शव उठने दिया जाएगा। जिसके लिए अधिकारी समाचार लिखे जाने तक मनाने में लगे हैं। कानपुर जोन के एडीजी आलोक सिंह और मंडलायुक्त बीती पूरी रात गांव में रहे लेकिन समाचार लिखे जाने तक बात न बन पाई है।
इस दौरान सरकार विरोधी कई राजनीतिक दल भी गांव पहुंचते नजर आए। हालातों से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
मामले में यूपी के सीएम बृजेश पाठक ने भी हस्तक्षेप किया है । उनके आश्वासन पर परिजन शवों का अंतिम संस्कार करने पर राजी तो हो गये लेकिन अभी तक किया नहीं है।
वहीं दूसरी ओर दिवंगत प्रमिला के बेटे शिवम दीक्षित तहरीर में लिखा कि 14 जनवरी को मैथा एसडीएम, लेखपाल व रूरा एसओ बुलडोजर लेकर बिना किसी सूचना के मकान गिराने आ गए। इसके बाद हम मवेशी संग कलेक्ट्रेट पहुंचे जहां एडीएम प्रशासन ने सुनवाई नहीं की बल्कि बलवा का मुकदमा लिखवा दिया गया।
इसके बाद सोमवार को यही लोग टीम लेकर आए और विपक्षी अशोक दीक्षित, अनिल दीक्षित, निर्मल, विशाल व बुलडोजर का चालक दीपक सुनियोजित तरीके से आए। परिवार घर में था लेकिन सूचित किए बना निर्माण गिराने लगे। आरोप है कि लेखपाल ने आग लगा दी और एसडीएम ने कहा कि आग लगा दो झोपड़ी में कोई बच न पाए। मुझे भी पीटा गया और एसओ व पुलिसकर्मियों ने आग में फेंकने की कोशिश की। आग से मेरी मां व बहन जलकर मर गईं जबकि पिता झुलस गए। फिलहाल घटना के बाद हालात तनावपूर्ण है जिस पर नियंत्रण पाने की कोशिश की जा रही है।


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