टिकट मांगते मांगते विधायक प्रत्याशी की चाहत में कई नेता बूढ़े हो गए पर भोजपुर विधानसभा क्षेत्र से नहीं मिला टिकट

स्थानीय प्रत्याशी हुए सक्रिय, भोजपुर क्षेत्र से पटवा का टिकट अधर में, क्षेत्र में चल रही बदलाव की बहार

सीएल गौर, संभागीय ब्यूरो, राष्ट्रीय समाज जागरण की विशेष रिपोर्ट,,,,

भोपाल/ रायसेन। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही आगामी 17 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा पार्टी हाई कमान द्वारा सांची सिलवानी एवं उदयपुरा सीट पर अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं परंतु भोजपुर विधानसभा क्षेत्र से अभी तक किसी के नाम की घोषणा नहीं हो पाई है वर्तमान विधायक सुरेंद्र पटवा टिकट को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं क्योंकि उनकी पार्टी के ही अनेक नेताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया है । वैसे भी देखा जाए तो जब-जब भी मध्य प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हुए हैं तब भोजपुर विधानसभा क्षेत्र हमेशा चर्चाओं में रहा है इस बार भी क्षेत्र की चर्चा हो रही है वहीं सबसे बड़ी बात इस क्षेत्र में है देखने में आ रही है कि इस क्षेत्र के कई वरिष्ठ भाजपा नेता पार्टी का काम करते-करते और टिकट मांगते मांगते बूढ़े हो गए हैं परंतु पार्टी ने उन्हें अभी तक टिकट नहीं दिया है, इस बार ऐसे आधा दर्जन नेता टिकट की आस में एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में इस समय जिन नेताओं की चर्चा है उनमें प्रमुख रूप से पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी, वरिष्ठ भाजपा नेता जोधा सिंह अटवाल, विपिन भार्गव, कृष्ण गोपाल पाठक, राजेंद्र अग्रवाल, श्रीमती सुधा बेध चौरसिया आदि कई नेता भोजपुर क्षेत्र से टिकट पाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, देखना अब यह है कि भाजपा द्वारा आगामी समय में जारी की जाने वाली पांचवी सूची में इस भोजपुर क्षेत्र से किस नेता को टिकट मिलेगा यह बात अभी भाजपा हाई कमान के पाले में है। पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा का भोजपुर क्षेत्र अब बदला बदला नजर आ रहा है और राजनीतिक परिदृश्य भी पहले से वर्तमान में काफी कुछ बदल गया है वर्तमान में उनके भतीजे सुरेंद्र पटवा यहां से विधायक हैं उनका इस बार क्षेत्र में विरोध हो रहा है क्षेत्र की आम जनता में भी इस बात की चर्चाएं सुने दे रही है। वहीं दूसरी और भोजपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी की ओर से जो नेता टिकट पाने के लिए सक्रिय हैं उनमें प्रमुख रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष बद्री सिंह चौहान, राजेश पटेल, बद्री पाल एवं युद्ध वीर सिंह पटेल इस क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट मांग रहे हैं अब देखना है कि कांग्रेस की पार्टी की नवरात्र में जारी होने वाली सूची में किस नेता का नाम आता है यह तो तभी पता चलेगा परंतु इस क्षेत्र से पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल भारी पड़ रहे हैं। भोजपुर क्षेत्र इस समय भाजपा पार्टी का गढ़ बन चुका है यहां कांग्रेस कमजोर साबित हो रही है सुरेश पचौरी, अजय सिंह राहुल भैया जैसे बड़े नेता भी क्षेत्र से चुनाव हार चुके है। कांग्रेस पार्टी इस बार किस नेता को यहां से टिकट देती है यह तो सूची जारी होने के बाद ही पता चलेगा परंतु कांग्रेस पार्टी हाई कमान भोजपुर क्षेत्र के लिए कोई वजनदार नेता को ही टिकट देगी इस बात की प्रबल संभावनाएं देखने में आ रही है।

भोजपुर विधानसभा क्षेत्र का इतिहास एक नजर में,,,,

राजधानी भोपाल से लगा हुआ भोजपुर विधानसभा क्षेत्र का इतिहास निराला है प्राचीन कालीन एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग भोजपुर मंदिर जो कि विश्व विख्यात है इसके अलावा इस क्षेत्र में मां कंकाली देवी का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, इसके अलावा यह क्षेत्र गोंडवाना का इतिहास भी संजोए हुए हैं यहां पर वर्ण बांध तथा सिघोरी वन अभ्यारण एवं राता पानी वन अभ्यारण टाइगर रिजर्व के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं, इसके अलावा मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र संपूर्ण भारत की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान के दिग्दर्शन करता नजर आता है। यहां का हरा भरा वन परिक्षेत्र एवं विंध्याचल की पर्वतमालाओं के बीच वनवासी संस्कृति को समेटे हुए हैं यहां की बासमती धान पूरे विश्व में भोजपुर की पहचान रखती है इसके अलावा राजनीतिक महत्व को दर्शाता है कभी यहां गोंड राजाओं का राज रहा तो कभी भोपाल के नवाब ने शासन किया जब देश 1947 में आजाद हुआ लेकिन यह क्षेत्र भोपाल स्टेट के साथ बिलीनीकरण आंदोलन के बाद 1949 में तिरंगा फहरा सका। सभी राजनीतिक दलों ने अपना दम दिखाया जिसके तहत 1972 में कांग्रेस के गुलाबचंद तनोट, 1977 में परमचंद जैन जनता पार्टी से, 1980 में शालिग्राम श्रीवास्तव भारतीय जनता पार्टी से, 1985 में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवार क्षेत्र से चुनाव लड़ते रहे 2003 में कांग्रेस पार्टी के राजेश पटेल यहां से विधायक चुने गए, वर्ष 2008 में यहां से अभी तक पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा लगातार यहां से विधायक हैं इसके अलावा एक बार उपचुनाव हुए जिसमें रामकिशन चौहान एवं नरेश पटेल सनखेड़ा इस क्षेत्र से विधायक चुने जा चुके हैं। इस तरह से भोजपुर विधानसभा क्षेत्र का अभी तक का इतिहास है परंतु पहले की स्थिति और वर्तमान स्थिति में जमीन आसमान का अंतर देखने में आ रहा है, अब क्षेत्र की जनता भी बदलाव चाह रही है कब तक एक ही प्रत्याशी को आम जनता झेलते रहेगी अब परिवर्तन की लहर भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में तेजी के साथ चल रही है, देखना अब है कि भारतीय जनता पार्टी की पांचवी सूची में भोजपुर क्षेत्र से किस नेता को भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी बनाया जाएगा इसका निर्णय भाजपा हाई कमान ही करेगी। वैसे भी देखा जाए तो बदलाव प्रकृति का नियम है क्षेत्र में बदल होते रहना चाहिए और राजनीतिक दलों को परिवर्तन भी करते रहना चाहिए इस बात की चर्चा आम जनता के बीच भी सुनाई दे रही है लेकिन आम जनता की आवाज को राजनीतिक दल कब तक पहचान पाएंगे यह उनके ऊपर निर्भर है।