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मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र चुनाव 2024 में त्रिकोणीय मुकाबले में असमंजस बरकरार*


*इण्डिया एनडीए और बसपा के बीच कड़ा मुकाबला स्थानीय बनाम बाहरी के मुद्दे से एनडीए को कड़ी मशक्कत*

*शशि भूषण दूबे कंचनीय यूपी स्टेट ब्यूरो प्रमुख*

मिर्जापुर 31 मई। मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र का चुनाव सातवें चरण में एक जून को होगा इस संसदीय क्षेत्र में कुल तकरीबन 18 लाख लगभग मतदाता हैं, और पांच विधानसभा क्षेत्र छानबे (अजा) मिर्जापुर, मझवा, चुनार, मड़िहान को शामिल करके संसदीय क्षेत्र की संरचना 2009 से किया गया है। इसके पूर्व इस जिले में दो संसदीय क्षेत्रो का हिस्सा शामिल रहा है। जिसमें मिर्जापुर जिले के दो विधानसभा क्षेत्र छानबे एवं मिर्जापुर को भदोही जिले के तीन विधानसभा क्षेत्र औराई भदोही ज्ञानपुर को मिला कर बनाया गया था। वहीं तीन विधानसभा क्षेत्र सोनभद्र जिले के रावर्टसगंज संसदीय क्षेत्र में शामिल किया गया था। मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र में प्रथम बार सांसद बनने का खिताब समाजवादी पार्टी के खाते में बाल कुमार पटेल ने प्राप्त किया था। जबकि मिर्जापुर भदोही संसदीय क्षेत्र का पहला सांसद नयी दिल्ली से चलकर आदिवासियों की सेवा लिए आये जान नोबुल विल्सन दो बार लगातार सांसद चुने गए थे जबकि आखिरी बार सांसद बसपा के रमेश दुबे 2007 के उप चुनाव में जीते थे। इस तरह मिर्जापुर की तेरहवीं सांसद मौजूदा सांसद एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल लगातार दो बार से सांसद चूनी गयी है जबकि तीसरी बार चुनाव जीतने के लिए हैट्रिक लगाने में वह जी तोड मेहनत कर रही है। हालांकि इस क्षेत्र का रिकॉर्ड रहा है कि तीसरे बार हैट्रिक लगाने में अबतक कोई कामयाब नही हुआ है तीसरे बार चुनाव लडने का मौका मिल चुके 1989 में कांग्रेस के मौजूदा सांसद उमा कांत मिश्र जनता दल के मजदूर नेता युसुफ बेग से हैट्रिक लगाने में तीसरे बार कामयाबी हासिल नहीं कर सके। श्री बेग से पराजित होना पड़ा था वहीं दूसरे सांसद भाजपा के वीरेन्द्र सिंह मस्त भी  तीसरे बार हैट्रिक लगाने में समाजवादी पार्टी की श्रीमती फूलन देवी निषाद से 1999 मे नाकामयाब रहे अब तीसरी बार हैट्रिक लगाने के लिए मौजूदा सांसद अनुप्रिया पटेल एन डी ए (अपना दल एस) पूरी तरह जोड़-तोड़ कर रही है जिनका मुकाबला मझवा विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक का चुनाव लड़कर हैट्रिक लगाने वाले डा रमेश चंद्र बिन्द से है जिन्होंने मझवा में तीन बार विधायक होने का हैट्रिक लगाकर रिकॉर्ड बनाया है। मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र में सर्वाधिक मतदाता लगभग तीन लाख पटेल है वहीं दूसरे नंबर पर ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या लगभग पौने तीन लाख है तीसरे स्थान पर बिंद निषाद मतदाता लगभग ढाई लाख है जबकि अन्यान्य जातियों की संख्या दो लाख एवं एक लाख वोट के अंदर ही है। गौरतलब बात यह है कि सर्वाधिक पटेल मतदाता चुनार विधानसभा क्षेत्र में एक लाख चालीस हजार लगभग एवं दूसरे स्थान पर मड़िहान विधानसभा क्षेत्र में पटेल मतदाताओं की संख्या लगभग अस्सी हजार तीसरे स्थान पर छानबे विधानसभा क्षेत्र में लगभग तीस हजार एवं मिर्जापुर विधानसभा क्षेत्र में पटेल मतदाताओं की संख्या पच्चीस हजार वहीं मझवा विधानसभा क्षेत्र में पटेल मतदाताओं की संख्या लगभग पन्द्रह हजार जबकि ब्राह्मण मतदाताओं की विधानसभा क्षेत्रवार अनुमानित जन संख्या इस तरह है मझवा विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या लगभग अस्सी हजार वहीं मिर्जापुर विधानसभा क्षेत्र में पचासी हजार छानबे विधानसभा क्षेत्र में चालीस हजार लगभग जबकि मड़िहान विधानसभा क्षेत्र में पच्चीस हजार लगभग एवं चुनार विधानसभा क्षेत्र में लगभग चालीस हजार ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या होने का सर्वेक्षण अनुमान है। तीसरे नंबर पर बिंद निषाद के आंकड़े इस तरह है सर्वाधिक मझवा विधानसभा क्षेत्र में लगभग पचहत्तर हजार जबकि दूसरे स्थान पर छानबे विधानसभा क्षेत्र में बिंद निषाद पचपन हजार वहीं मिर्जापुर विधानसभा क्षेत्र में पैंतीस हजार जबकि मड़िहान विधानसभा क्षेत्र में चालीस हजार मतदाता वहीं चुनार विधानसभा क्षेत्र में पैंतालीस हजार मतदाताओं की संख्या का अनुमानित सर्वेक्षण है।
*एक बात गौरतलब है कि मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र में पटेल मतदाताओं की संख्या चार लाख होने का हौवा खड़ा किया गया है जो सत्य से परे है मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र में पटेल एवं ब्राह्मण दोनों मतदाताओं की संख्या में मामूली अंतर है लेकिन कुछ जातिवादी राजनीतिक ताकतों ने पटेल की संख्या ज्यादा दर्शाई गई है जो राजनीतिक भ्रम है*
इस संसदीय क्षेत्र में पटेल ब्राह्मण बैष्य राजपूत एक मंच पर होने और पटेल प्रत्याशी के चुनाव जीतने पर ऐसा दुष्प्रचार कर एक जाति को चार लाख के उपर दर्शाया जाना राजनीतिक कुचक्र रचा गया है।
मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र से 1952 एवं 1957 में कांग्रेस के जे एन विल्सन, 1962 कांग्रेस के श्यामधर मिश्र, 1967 भारतीय जनसंघ के वंश नारायण सिंह (क़मरी वाले) 1971 कांग्रेस के अजीज इमाम 1977 जनता पार्टी के फकीर अली अंसारी, 1980 कांग्रेस के अजीज इमाम 1981 उप चुनाव में कांग्रेस पंडित उमा कांत मिश्र,1984 कांग्रेस के पंडित उमा कांत मिश्र जबकि 1989 में कांग्रेस के सांसद पंडित उमा कांत मिश्र तीसरे बार जीत हासिल करने की हैट्रिक लगाने में कामयाब नहीं हुए और वह जनता दल के युसुफ बेग से चुनाव हार गए जबकि 1991 में भाजपा के वीरेन्द्र सिंह मस्त चुनाव जीतने में कामयाब रहे। जबकि 1996 में समाजवादी पार्टी ने दस्यु सुंदरी फूलन देवी निषाद को लड़ाया वह भाजपा के वीरेन्द्र सिंह मस्त को पटखनी देकर चुनाव जीत गयी उसके बाद 1998 के मध्यावधि चुनाव में भाजपा के वीरेन्द्र सिंह मस्त ने फूलन देवी निषाद को पराजित करने में कामयाब हो गए। उसके बाद तेरह महीने बाद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की सरकार धराशाई होने पर आम चुनाव 1999 में समाजवादी पार्टी की फूलन देवी निषाद ने भाजपा के वीरेन्द्र सिंह मस्त से अपने हार का बदला चुकता करते हुए पुनः दुबारा सांसद चुनी गई लेकिन दुर्भाग्यवश 25 जुलाई 2001 को फूलन देवी निषाद की हत्या हो गई। उसके बाद उप चुनाव 2002 में समाजवादी पार्टी के रामरति बिंद ने भाजपा के राम चन्द्र मौर्य एवं कांग्रेस के राजेश पति त्रिपाठी को पराजित करके सांसद बन गये।  वहीं 2004 के आम चुनाव में बसपा के नरेन्द्र कुशवाहा ने समाजवादी पार्टी के सांसद रहे रामरति बिंद को पराजित किया लेकिन दूर्भाग्यपूर्ण स्थिति में मिर्जापुर के सांसद नरेन्द्र कुशवाहा ने शर्मशार कर लोकसभा में प्रश्न उठाने के बदले रिश्वत मामले के स्ट्रींग आपरेशन में लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी द्वारा अयोग्य घोषित कर दिए गए। तदुपरान्त तीसरे बार उप चुनाव का मिर्जापुर भदोही संसदीय क्षेत्र को  2007 में सामना करना पड़ा तब बसपा ने पुनः इस क्षेत्र में अपना दबदबा कायम रखा और‌उप चुनाव में बसपा के रमेश दुबे ने समाजवादी पार्टी के शारदा प्रसाद बिंद  पूर्व विधायक को पराजित करके अपना दबदबा कायम रखा। लेकिन 2009 के आम चुनाव में बसपा ने ऐन वक्त पर अपने घोषित प्रत्याशी सांसद रमेश दुबे का टिकट काट दिया और घोरावल के विधायक अनिल कुमार कुशवाहा को टिकट दिया जहां चुनाव में केन्द्रीय सत्ता में काबिज कांग्रेस ने जोड़-तोड़ करके उस वक्त की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा सिंह शेखावत के अनुशंसा पर कांग्रेस के अघोषित प्रत्याशी राजेश पति त्रिपाठी का टिकट काट कर बसपा सांसद रमेश दुबे को टिकट थमा दिया था लेकिन कामयाबी हासिल नहीं हुई उस चुनाव में रमेश दुबे मिर्जापुर के इकलौते प्रत्याशी रहे जिन्होंने हेलीकॉप्टर से चुनाव प्रचार किया लेकिन वह समाजवादी पार्टी के बाल कुमार पटेल से चुनाव हार गए और चौथे पायदान पर पहुंच गये। जबकि भाजपा ने पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह के सुपुत्र अनुराग पटेल को लड़ाया था वह तीसरे पायदान पर रहे। श्री पटेल ने बसपा के अनिल कुमार कुशवाहा को पराजित करने में कामयाब हुए।  2014 के आम चुनाव के बहुत हुई मंहगाई की मार अबकी मोदी सरकार लहर में यह सीट भाजपा ने रोहनिया वाराणसी से विधायक अनुप्रिया पटेल को गठबंधन में टिकट दिया जबकि समाजवादी पार्टी ने भारी भूल कर मिर्जापुर के सांसद बाल कुमार पटेल को बांदा संसदीय क्षेत्र से टिकट दिया और मिर्जापुर से समाजवादी पार्टी के सरकार में राज्य मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल को लड़ाया जो उसके पहले अपना दल के विधायक रहे बाद में सपा में शामिल हुए थे, वहीं बसपा ने अपने विधायक डा रमेश चंद्र बिन्द की धर्मपत्नी श्रीमती समुद्रा बिंद जबकि कांग्रेस ने अपने मड़िहान विधायक ललितेशपति त्रिपाठी को लड़ाया था लेकिन कांग्रेस ने अपनी ताकत तो बढ़ाई चौथे पायदान से वह तीसरे पायदान पर पहुंच गयी वहीं समाजवादी पार्टी पहले पायदान से चौथे स्थान पर सुरेन्द्र सिंह पटेल को लड़ा कर अपनी शक्ति क्षीण कर लिया और अनुप्रिया पटेल ने बसपा की समुद्रा बिंद को पराजित करके सांसद बन गई। उधर 2019 के चुनाव में एन डी ए बनाम सपा बसपा रहा है। जहां अनुप्रिया पटेल ने सपा बसपा गठबंधन में बसपा के राम चरित्र निषाद को पराजित करने में कामयाब हुई। वहीं इस चुनाव में भी कांग्रेस तीसरे पायदान पर उसके प्रत्याशी ललितेशपति त्रिपाठी रहे।
अब बात करते हैं मिर्जापुर लोकसभा चुनाव 2024 की जहां मुख्य मुकाबला  त्रिकोणीय है इस बार इण्डिया गठबंधन एवं एन डी ए तथा बसपा के बीच मुकाबला है एन डी ए की केन्द्रीय राज्यमंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल एवं इण्डिया गठबंधन से भदोही सांसद डा रमेश चंद्र बिन्द बसपा से मनीष त्रिपाठी के बीच इस लिए रोचक मुकाबला हो गया है कि ब्राह्मण समाज के मतदाताओं की भाजपा से मुंह भंग हो गया है वह हर विधानसभा क्षेत्र में साठ प्रतिशत मतदाताओं का बसपा की ओर रूझान होने से बसपा भी मुकाबले में आ गयी है। अबतक इन ब्राह्मण मतदाताओं को भाजपा का अंध समर्थक माना जाता था। लेकिन इस बार वह जिस तरह से भाजपा और उसके समर्थित अपना दल एस प्रत्याशी अनुप्रिया पटेल से मुंह भंग कर लिया है इसके दो मायने है पहला बसपा मुख्य मुकाबला में आ गयी और इण्डिया गठबंधन प्रत्याशी डॉ रमेश चंद्र बिन्द के लिए सफलता तक पहुंचाने में कामयाब बनाने में मददगार भी सावित हो सकती है। इससे इण्डिया गठबंधन प्रत्याशी एवं उसके समर्थकों का हौसला बुलंद हो गया है। वहीं इस वार इण्डिया गठबंधन को बिंद निषाद सोनकर,पासी, मौर्य पाल वोट का इजाफा हुआ है जिससे एन डी ए समर्थित अपना दल एस प्रत्याशी अनुप्रिया पटेल की हालत पतली होती जा रही हैं। एन डी ए को अब चौतरफा वोट कटने से वह मुश्किल में है।
उधर पटेल बिरादरी के चुनार विधानसभा क्षेत्र के कद्दावर नेता दौलत सिंह पटेल भी अपना दल कमेरावादी, के टिकट पर सफर कर रहे हैं उनका भी पकड़ चुनार एवं मड़िहान विधानसभा क्षेत्र के पटेल मतदाताओं पर है,और सोनेलाल पटेल की विधवा श्रीमती कृष्णा पटेल और उनकी बेटी पल्लवी पटेल विधायक के समर्थक पांचों विधानसभा क्षेत्र में दौलत सिंह पटेल के समर्थन में जुटे हुए हैं। जिससे ऐसा आंकलन है कि इस बार पटेल मतदाताओं में भी विभाजन हुआ है जिसका भी लाभ इण्डिया गठबंधन प्रत्याशी को मिल रहा है। उधर बसपा प्रत्याशी मनीष त्रिपाठी के समर्थन में ड्रमण्डगंज हलिया पिपरा देवरी बाजारों के व्यापारियों का रूझान देखने से लगता है कि बैष्य समाज भी आंशिक रूप से छानबे विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा सांसद से विमुख हो गया है। अपना दल एस प्रत्याशी को एक तरफ सोनभद्र सांसद पकौड़ी लाल कोल का टिकट काट देने से कोल समाज भी बंट रहा है वहीं दिनेश कोल के मौत मामले में भी कोल समाज नाराज हो गया है। उधर कुण्डा विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया के मामले एवं राजा विजयपुर श्री निवास प्रसाद सिंह की प्रतिमा की जगह गैपुरा चौमुहानी पर पूर्व विधायक स्वामी ब्रह्माश्रम की मूर्ति लगवाने में मंत्री आशीष पटेल की भूमिका से भी ठाकुर समाज नाखूश है। इससे भी कुछ आशिक नुकसान की आसंका बनी हुई है। देखना है कि राजा भैया के साथ दुर्व्यवहार टिप्पणी के लिए कितने लोगों में आक्रोश है और कितना नुक्सान हो सकता है।
उधर इण्डिया गठबंधन प्रत्याशी डॉ बिन्द के प्रति भी कुछ फारवर्ड जातियों में असंतोष व्याप्त है लेकिन जिनको असंतोष है वह बसपा से जुड़े है इसलिए राजनीति लाभ हानि बराबर हो गया है। जबकि एक ओबीसी जाति को छोड़कर अन्य ओबीसी एवं दलितों को प्रभावित करने में इण्डिया गठबंधन प्रत्याशी डॉ बिन्द कामयाब हो रहे हैं यह चुनाव परिणाम आने पर पता चल सकता है।
इण्डिया गठबंधन प्रत्याशी डॉ बिन्द के समर्थन में कांग्रेस के स्टार प्रचारक एवं पूर्व विधायक भगवती प्रसाद चौधरी, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष डॉ शिव कुमार सिंह पटेल शहर‌ कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजन पाठक वहीं आम आदमी पार्टी से उसके प्रदेश सचिव सुनील कुमार पाण्डेय आम आदमी पार्टी जिला अध्यक्ष प्रो बी सिंह पटेल दिलीप सिंह गहरवार आदि जी तोड मेहनत किया है। जबकि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद अरुण सिंह एम एल सी बिनीत सिंह, पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र भी जी तोड मेहनत किया है।
समाजवादी पार्टी के तरफ से कानपुर विधायक अमिताभ बाजपेई गोण्डा के पूर्व विधायक बैजनाथ दूबे, फैजाबाद के पूर्व विधायक पवन कुमार पाण्डेय, जौनपुर विधायक रागिनी सोनकर, पूर्व मंत्री प्रोफेसर अभिशेष मिश्र पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल समूचे क्षेत्र में जन संपर्क करते हुए मतदाताओं को रिझाने का काम किया है। जबकि समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी पूर्व राज्यमंत्री कैलाश चौरसिया मझवा के  पूर्व विधायक प्रत्याशी रोहित शुक्ल लल्लू,
पूर्व विधायक जगदम्बा सिंह पटेल पूर्व जिला अध्यक्ष शिव शंकर यादव पूर्व जिला अध्यक्ष आशीष यादव, जैसे कद्दावर नेता समूचे संसदीय क्षेत्र में रिझाने में लगे रहे।
उल्लेखनीय है कि मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र में एन डी ए प्रत्याशी अनुप्रिया पटेल के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक यूपी के मंत्री आशीष सिंह,डा दया शंकर मिश्र दयालु,  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल जबकि बसपा राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री मायावती आदि की जन सभाओं में मतदाताओं को रिझाने में लगी रही।
इसबार लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय प्रत्याशी के मुद्दे पर भी जोर है क्योंकि 1989 के बाद से मिर्जापुर का कोई ब्यक्ति सांसद नहीं चुना गया हमेशा बाहरी ब्यक्ति ही सांसद चूने जाने से इस बार स्थानीय और बाहरी पर चर्चा गरम है।


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