साधनसेवी पंकज वर्मा ने बताया कि तिथि भोजन योजना जिले में काफी समय से लागू है। इसके तहत विशेष तिथि पर समाजसेवी, ग्राम प्रधान और अन्य दानदाता या शिक्षक मिड-डे-मील से हटकर छात्र-छात्राओं को अपनी इच्छा से स्कूल में भोजन खिला सकते हैं।
फारबिसगंज /डा. रूद्र किंकर वर्मा।
प्राथमिक विद्यालय छुरछुरिया संकुल- बसगड़ा रामपुर प्रखण्ड-फारबिसगंज में आज तिथि भोजन का आयोजन किया गया। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग,बिहार सरकार के आदेशानुसार सभी सरकारी विद्यालयों में नई शिक्षा नीति के चार वर्ष पूर्ण होने पर शिक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। उसी क्रम में एक दिन सामुदायिक भागीदारी दिवस पर तिथि भोज का आयोजन करना था।इस तिथि भोज में पोषक क्षेत्र के अभिभावकों को भी आमंत्रित कियागया। शिक्षा सप्ताह दिवस में संगोष्ठी, नवाचारी शिक्षण पद्धतियों और आनंदमय शिक्षण पर संवाद सत्र के साथ साथ अभिभावकों को बच्चों व स्कूल को निपुण बनाने के लिए शपथ दिलाई गई । बच्चों से पुस्तकें पढ़ाने, मौलिक साक्षरता और संख्यात्मकता से संबंधित गतिविधियां होंगी। कहानी सुनाकर भाषा विकास की दिशा में प्रयास होगा। मौके पर विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों के साथ जनप्रतिनिधियों में मुखिया, विवेकानंद मंडल, वार्ड सदस्य भारती भास्कर,भूमिदाता विनोद कुमार सिंह, के साथ जिला समन्वयक सरोज तिवारी ,प्रखण्ड साधनसेवी पंकज वर्मा उपस्थित थे। जिला समन्वयक मिड डे मील सरोज तिवारी के साथ प्रखण्ड साधनसेवी पंकज वर्मा ने बताया कि तिथि भोजन योजना जिले में काफी समय से लागू है। इसके तहत विशेष तिथि पर समाजसेवी, ग्राम प्रधान और अन्य दानदाता या शिक्षक मिड-डे-मील से हटकर छात्र-छात्राओं को अपनी इच्छा से स्कूल में भोजन खिला सकते हैं।अभी नई शिक्षा नीति के चौथे वर्षगांठ पर शिक्षा विभाग द्वारा एक सप्ताह तक हर दिन अलग अलग थीम पर विद्यालय में गतिबिधियों का आयोजन किया गया । प्राथमिक शिक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की चौथी वर्षगांठ एक सप्ताह तक चलने वाले अभियान, “शिक्षा सप्ताह” के साथ मना रहा है। देशभर के स्कूल “विद्यांजलि और तिथि भोजन के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी” के साथ “शिक्षा सप्ताह” का 7वां दिन मना रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की चौथी वर्षगांठ को एक सप्ताह तक चलने वाले अभियान “शिक्षा सप्ताह” के साथ मना रहा है। 7वें दिन, देशभर के स्कूल विद्यांजलि और तिथि भोजन पहल के माध्यम से शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी पर जोर दे रहे हैं।
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