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पूतना को कृष्ण की पालक माँ कहा जाता है-कथा व्यास आचार्य कौशलेन्द्र त्रिपाठी

संवाददाता /अरुण पाण्डेय (गुरूजी)

घोरावाल/ सोनभद्र। सिद्धी गाँव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस व्यास पीठ से कथा व्यास आचार्य पण्डित कौशलेंद्र त्रिपाठी ने पूतना उद्धार, भगवान की मन मोहन बाल लीलाए, माखन चोरी और गोवर्धन पूजा की कथा का सुंदर रसास्वादन कराया। कथा में आज व्यास जी ने पूतना उद्धार की कथा का सुंदर चित्रण किया।पूतना पूर्व जन्म में राजा बलि की पुत्री थी। जब भगवान वामन जी ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी उस समय उनके बाल रूप को देखकर रत्नमाला ने सोचा कि उनका भी पुत्र ऐसा ही हो। इसी इच्छा के चलते वह अगले जन्म में पूतना बनी। पूतना को कृष्ण की पालक मां भी माना जाता है। क्योंकि उसने उन्हें स्तनपान कराया था। कथा का विस्तार करते हुए व्यास जी ने गोवर्धन लीला का वर्णन किया। गो +वर्धन=गौ वंश बढाना। इंद्र की पूजा नही हुई इसलिए क्रोधित होकर इंद्र ने सम्पूर्ण ब्रज मंडल को ही बहाने की ठान ली। इंद्र ने जल बरसाना शुरू किया।श्रीकृष्ण जी ने सभी ब्रज वासियो और गाय बछड़ों को लेकर गोवर्धन आये।वहाँ सभी की रक्षा के लिए गोवर्धन को जिसकी लम्बाई चौड़ाई 7 कोस ऐसे कलिकाल के देवता गोवर्धननाथ को सात वर्ष के कन्हैया ने अपनी बाएं हाथ की कनिष्ठिका अँगुली के नाखून के अग्र भाग पर सात दिनों तक धारण कर भूखे प्यासे रह कर इन्द्र जी के घमण्ड को तोड़ दिया। इसलिए जीव को कभी भी घमण्ड नहीं करना चाहिए। जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा। कार्यक्रम में सर्वप्रथम विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री राजीव कुमार ने व्यास जी का माल्यार्पण अंग वस्त्र,और स्मृति चिन्ह से स्वागत किया। तथा मुख्य यजमान पण्डित हरिराम मिश्र का भी माल्यार्पण, अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह से स्वागत किया। कार्यक्रम में रामानन्द पाण्डेय, रमेश पाण्डेय, आचार्य प्रशांत त्रिपाठी, किशन जी शुभम कुमार, अंकित, जगदीश शुक्ल और श्रद्धालूगण मौजूद रहे.


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