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भिखना पहाड़ी के बाद रुकना नही राधिका पाठको की बन रही पसंद

दैनिक समाज जागरण अनील कुमार संवाददाता नबीनगर (औरंगाबाद)

नबीनगर (बिहार) 13 फरवरी 2024 “भिखना पहाड़ी” के अपार सफलता के बाद ”रुकना नहीं राधिका” पुस्तक मेले मे भी पाठको की काफी पसंद की गई है।पुस्तक के लेखक रमेश चंद्र शिक्षा विभाग बिहार मे सचिवालय स्थित सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।पुस्तक भिखना पहाड़ी और रुकना नही राधिका रमेश चंद्र की कहानियों का संग्रह है।लेखक रमेश चंद्र एक लेखक ही नहीं अपितु एक अच्छे गीतकार,संगीतकार,रचनाकार के साथ साथ एक अच्छे इन्सान एवम शिक्षाविद भी है।लेखक रमेश चंद्र समाज में व्याप्त व्यापक मुदूदों की छोटी-छोटी बातों को कहानी के शिल्प में सफलतापूर्वक ढालते हैं। कथाओं में सिंफनी-सा तारी है, वह है मानवीय संवेदना। सभी कहानियों में घनीभूत संवेदना के बीच का शीर्षक रुकना नही राधिका एक गरीब मां की हौसले वाली बिटिया की कहानी है जो बेबसी गरीबी की दीवार लांघकर सफलता की प्रेरणादाई और मार्मिक कहानी है।वही पुस्तक भिखना पहाड़ी और रुकना नहीं राधिका प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए पहली पसंद बन रही है।लेखक रमेश चंद्र अपनी कहानियों से भाव विह्वल कर देते है।सचमुच “रुकना नहीं राधिका” आज आम आदमी की आवाज़ बनती जा रही है।यह पुस्तक ज़िंदगी में कुछ बेहतर करने और कभी हार न मानने का संदेश ही नहीं देती बल्कि मानवीय मूल्यों को बारीकी से प्रस्तुत भी करती है। यह महज किताब ही नहीं, एक वफ़ादार दोस्त भी है। यह पुस्तक बच्चों के लिए भी काफी उपयोगी है। ‘प्रभात प्रकाशन’ नई दिल्ली से प्रकाशित यह पुस्तक हर स्टॉल पर उपलब्ध है। यह अमेजन, फ्लिपकार्ट और हर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। पुस्तक पर पद्म श्री आनन्द कुमार, महान गणितज्ञ एवम सुपर 30 के संचालक ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि लेखक रमेश चंद्र जमीन से जुड़े एक ऐसे लेखक है जो अपनी पहली पुस्तक भिखना पहाड़ी से बेस्ट बुक सेलर मे आज आम आदमी की आवाज बन गए है।इनकी कहानी बहती नही बहाती है। ये एक ऐसे लेखक है जो कलेजा निकालकर रख देते है।


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