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भारतीय राजनीतिक मे अनैतिकता और गांधी का परस्पर संबंध

नमस्कार मै हूँ रमन कुमार

भारतीय राजनीतिक मे अनैतिकता और गांधी यानि बापू का परस्पर संबंध। एक तरफ देश जहाँ महात्मा गांधी को बापू कहकर संबोधित करता है वही दूसरी तरफ बहुत कम लोगों को यह बात मालूम होगा कि भारतीय राजनीतिक मे अनैतिकता की शुरुआत भी गांधी के प्रवेश के साथ ही शुरु होता है। विचारक, बुद्धिजीवि इतिहासकार, कृष्णानंद सागर शर्मा चिंतना बैठक मे तीन ऐसी राजनीतिक घटनाओं का जिक्र किया है जो समझने के लिए काफी है कि किस प्रकार से भारतीय राजनीति मे अनैतिकता का प्रवेश हुआ वह आज तक जारी है। श्री शर्मा ने साथ मे वर्तमान समय मे राजनीतिक मे फैले अनैतिकता पर कोई आश्चर्य न जताते हुए कहा कि ” जिस पार्टी की या राजनीतिक दल मे शुरुआत से ही अनैतिकता रहा हो, जिसका लक्ष्य कभी भी भारत और भारतीयता नही रहा हो आप ऐसे पार्टियों से नैतिकता की बात करते है तो यह बैईमानी होगा। आखिर गांधी का राम से क्या वास्ता रहा है जब वह कभी मंदिर जाते ही नही थे। वही काम आज के कांग्रेस कर रही है। सत्य अहिंसा किसको पाठ पढ़ाते थे गांधी जी ? कही न कही भारत विभाजन का कारण भी गांधी जी ही थे। जिन्ना भी तो कांग्रेस मे ही था और गांधी जी से पहले से था। आखिर ऐसा क्या हुआ कि जिन्ना को मुस्लिम लीग बनानी पड़ी।

उन्होंने कहा है कि राजनीति के अनैतिकता समाप्त होने का समय आ गया है लेकिन इसमे समय लगेगा। 100 साल के बीमारियों को आप एक पल मे समाप्त नही कर सकते है। वर्तमान सत्ता मे जो सरकार है उसने ऊपरी स्तर पर ठीक करना शुरु कर दिया है लेकिन नीचे तक आते आते मे 10-15 साल लग सकते है। हमे चाहिए कि वर्तमान सत्ता मे जो सरकार है उसका समर्थन करें।


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