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आर आई सी टी इंस्टिट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन ने किया शर्बत वितरण


आज निर्जला एकादशी के शुभ अवसर पर अम्बेडकर रोड स्थित आर आई सी टी इंस्टिट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन ने शर्बत वितरण किया इस अवसर पर इंस्टिट्यूट के निदेशक विजय कौशिक ने बताया कि निर्जला एकादशी व्रत का महत्व इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपनी रक्षा व भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए मनुष्य ही नहीं देवता, दानव, नाग, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, नवग्रह आदि भी यह व्रत रखते हैं। इस व्रत के करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति जन्म मरण के बंधन से मुक्त होकर बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है।

एक पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में महर्षि व्यास ने पांडवों को निर्जला एकादशी के महत्व के बारे में बताया था। साथ ही पांडवों को यह व्रत करने की सलाह दी थी। वेदव्यास ने कई प्रकार के फल देने वाली एकादशी व्रत का संकल्प कराया, तो कुंती पुत्र भीम ने पूछा, ‘हे भगवान! मेरे पेट में वृक नामक अग्नि है, जिसे शांत रखने के लिए मुझे दिन में कई बार भरपेट भोजन करना पड़ता है। तो क्या मैं अपनी इस भूख के कारण एकादशी के पवित्र व्रत को नहीं रख पाऊंगा।’
तब महर्षि व्यास ने कहा- ‘हे कुंती पुत्र! यही धर्म की विशेषता है, जो न केवल सबका साथ देता है, बल्कि सबके अनुकूल साधन व्रत और नियमों को भी आसान बनाता है। तुम्हें केवल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत ही करना चाहिए। इस व्रत को करने से ही तुम्हें वर्ष की सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाएगा तथा तुम्हें इस लोक में सुख और यश मिलेगा तथा बैकुंठ धाम की प्राप्ति होगी।
तभी से वर्ष की सभी चौबीस एकादशियों का फल देने वाली इस महान निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी कहा जाने लगा। इस दिन निर्जल रहकर “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करने वाला व्यक्ति कई जन्मों के पापों से मुक्त होकर श्रीहरि के धाम को जाता है।
इस अवसर पर इंस्टिट्यूट से शिक्षक एवं शिक्षिका  नीलम, ज्योति, अंशु, गौरव, निरु,सिमरन, सुमित एवं छात्र छात्राओं ने राहगीरों को शर्बत वितरण कर धर्म लाभ कमाया .


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