समाज जागरण संवाददाता:- वेद प्रकाश पालीगंज अनुमंडल
पालीगंज/ स्थानीय बाजार स्थित आर्य समाज मन्दिर सह पुस्तकालय में शुक्रवार को आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती का दूसरा जन्म शताब्दी समापन समारोह सह ऋषि बोध दिवस मनाया गया।
जानकारी के अनुसार आयोजित समारोह की अध्यक्षता सतीशचन्द्र व संचालन राजकिशोर सिंह ने किया। इस अवसर पर स्वामी दयानंद सरस्वती को याद करते हुए उनकी तस्वीर पर पुष्प माला अर्पित किया गया। उसके बाद समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. श्यामनन्दन शर्मा व सतीशचन्द्र ने दीप प्रज्वलित कर बिधिवत रूप से किया। मौके पर सतीशचन्द्र ने बताया कि आज ही के दिन दयानन्द सरस्वती को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। जिसके कारण इसे ऋषि बोध दिवस के रूप में मनाया जाता है। दयानन्द सरस्वती भारतीय इतिहास में एक समाज सुधारक के रूप में जाने जाते है। उन्होंने रूढ़िवादी ब्यवस्था के प्रति लोगो को सजग किया साथ ही सत्यार्थ प्रकाश नामक ग्रन्थ की रचना कर सत्य से लोगो को परिचय कराया। वे वेदों के अच्छे ज्ञाता भी थे जिन्होंने ” वेदों की ओर लौटो।” का नारा दिया। जबकि डॉ. श्यामनन्दन शर्मा ने बताया कि इनका जन्म 1824 में गुजरात के सनातनी परिवार में हुआ था। जिनके पिता शंकर के मूल उपासक थे इस वजह से दयानन्द सरस्वती का नाम बचपन का मूलशंकर रखा गया था। जिन्होंने महा शिवरात्रि के दिन मूलशंकर को शिव मंदिर में रहने को कहा। जहां मूल शंकर ने एक चूहा को शंकर पर चढ़ाए मिठाई को खाते व नष्ट करते देखा। जिसे देख उन्होंने विचार किया कि यह कैसा भगवान जो अपने प्रसाद की भी रक्षा नही कर सकता तो हमारी रक्षा क्या करेगा? तब से उन्होंने मूर्तिपूजा का विरोध करने लगे। वही कुछ दिनों बाद उनकी बहन की मृत्यु हो गयी। बहन की मृतयु उनकी आत्मा को झकझोर दिया। उन्होंने ज्ञान व शांति की खोज करने के लिए वेदो व विभिन्न गर्न्थो का अध्ययन किया। उसके बाद उन्होंने बताया कि वेदों के अलावे कोई भी दूसरा ग्रन्थ नही है और वेद ज्ञान का नाम है। उसके बाद उन्होंने मूर्ति पूजा जैसे कई कुरीतियों का विरोध करते हुए बिधवा विवाह व अंतरजातीय विवाह जैसे कई बातों का समर्थन किया। वही वक्ताओं ने उनके जीवनी पर प्रकाश डाला।
मौके पर डॉ. ज्ञानप्रकाश, विजय यादव, महेंद्र पासवान, दुर्गेश नारायण, अनिल कुमार, विजय कुमार सिन्हा, विकास आर्या, विनय प्रसाद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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