संवाददाता आनन्द कुमार।
दैनिक समाज जागरण
दुद्धी/ सोनभद्र। इस्लाम धर्म में रमजान की तरह ही माहे-ए- -शाबान को भी बेहद पाक और मुबारक महीना माना जाता है. शाबान इस्लामिक कैलेंडर का आठवां महीना है, जिसकी 14वीं और 15वीं दरमियानी रात को मुसलमान शब -ए -बारात का त्यौहार मनाते हैं. मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए यह खास त्यौहारों में से एक है. इस दिन लोग विशेषकर अल्लाह की इबादत करते हैं. ऐसा माना जाता है कि शब-ए-बारात की रात की गई इबादत का सवाब बहुत ज्यादा मिलता है. इस वर्ष शब -ए -बारात का त्यौहार 13 फरवरी शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन की रात को मुस्लिम समुदाय के लोग क्षमता और प्रार्थना करते हैं, इसलिए इसे फजीलत की रात मानी जाती है. मान्यता के अनुसार शब-ए -बारात को एक प्रकार से रमजान में रखे जाने वाले रोजे के लिए खुद को तैयार करना माना जाता है. यह भी मानता है कि इस रात लोग अल्लाह से इबादत करते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा करते हैं. शब-ए -बारात, शब से आशय रात है और बारात(बअरात) का अर्थ बरी होना है. हिजरी कैलेंडर के अनुसार, यह रात साल में एक बार शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है. मुस्लिम मजहब के लोग इस पर्व को बड़े ही उत्साह पूर्वक मनाते हैं. बाकायदा इसकी तैयारीयां की जाती हैं. घरों में तमाम प्रकार के पकवान जैसे हलवा, बिरियानी, कोरमा आदि बनाया जाता है. इबादत के बाद इसे गरीबों में बांटा जाता है. शब-ए -बारात में मस्जिदों और कब्रिस्तान में बेहतर सजावट की जाती है.वहीं बुजुर्गों व अपने करीबियों की क़ब्र पर चिराग जलाए जाते हैं और उनकी मगफिरत की दुआएं मांगी जाती हैं।
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