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शीर्षक- सीखो मिलकर रहना


बेमतलब तुम यहाँ लड़ो मत, सीखो मिलकर रहना।
मन से मिटा दो नफरत तुम, छोड़ो गुस्सा अपना।।
यही है अपना कहना, सभी को मानो अपना।—–(2)
बेमतलब तुम यहाँ——————–।।

केवल अपनी नहीं यह धरती, सबका है अधिकार इसपे।
मातृभूमि है हम सबकी यह, हमने लिया है जन्म इसपे।।
सबको इसपे तुम बसने दो, जैसे घर है यहाँ अपना।
यही है अपना कहना, सभी को मानो अपना।—–(2)
बेमतलब तुम यहाँ——————-।।

कहते हैं जिसको अपना धर्म, मतलब उसका भी जानो।
मत बहको बहकाने से तुम, सच क्या है उसको जानो।।
कुछ को पसंद है बलवें कराना, जुर्म ऐसा तुम मत करना।
यही है अपना कहना, सभी को मानो अपना।—–(2)
बेमतलब तुम यहाँ——————–।।

खाक करो मत उनका सपना, कुर्बान हुए जो वतन के लिए।
मत करना बर्बादी यहाँ तुम, सीखो जीना सबके लिए।।
बना रहे यहाँ चैनो अमन, बस यही ख्वाब हो अपना।
यही है अपना कहना, सभी को मानो अपना।—–(2)
बेमतलब तुम यहाँ———————।।



शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)


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