लखीसराय :
50 दशक के कांग्रेस नेता सह स्वतंत्रता सेनानी,विधान परिषद स्वर्गीय रामरीझन सिंह का 30वां पुण्यतिथि बड़हिया कांग्रेस ऑफिस में मनाया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष चुन चुन सिंह ने किया। उपस्थित लोगों ने उनके तैलीय चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। उपस्थित लोगों ने उनके आदर्श जीवन एवं आंदोलन तथा राजनीतिक सफर पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। और कहा कि कालान्तर के राजनीति एवं वर्तमान राजनीतिक में काफी अंतर आ गया है। कालान्तर की राजनीति का नेता समाज सेवा था वर्तमान राजनीतिक परिवार और अपना सेवा रह गया है।रामरीझन बाबू के सादगी, ईमानदार चरित्र पर राजनीति में आने को मन करता है वर्तमान राजनीतिक में अच्छे लोग किनारे रहना चाहती है। रामरीझन बाबू के ईमानदारी ,आर्दश पर चलने से अच्छे लोग राजनीति में आ सकते हैं। बताते चलें कि इनका जन्म एक साधारण बडहिया के नूनू सिंह के द्वितीय पुत्र के रूप में जन्म लिये जब देश गुलाम था सातवां का डिग्री लेकर लेकर गांधीजी के अह्ववान पर भारत छोडों आंदोलन में कुद पडे। आजादी के बाद कांग्रेस का सदस्य बनकर बडहिया का राजनीति करने लगे। वे पुराना मुंगेर जिला कांग्रेस के काँग्रेस अध्यक्ष, बने फिर मुंगेर जिला बोर्ड के अधयक्ष, अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटि के सदस्य बनकर पद को सुशोभित किया। उनको प्यार से गांव वाले प्यार से चुभाई कहते थे। वे नाटा कद के थे पहनवा खादी का धोती कुर्ता माथा पर टोपी था। वे काफी तेज चलते थे । जिसके उनके पीछे कार्यकर्ता काफी पीछे रह जाते थे । महात्मा गांधीजी का 1942ई में अंग्रेज भारत छोडों आंदोलन में कूद परे। उनके बडे जेष्ट स्वर्गीय राजेश्वर प्रसाद सिंह ऊर्फ लाला जी भी भारत छोडो आंदोलन में कूद पडे।पिता गांधी बिचार बेटा गरम दल बिचार के थे। जब पुत्र को अंग्रेज सिपाही ने पकडा और बोला गांधी गोली मार दे ।वे भारत माता के जंजीरों से छुडाने के लिये वेहिचक कहा मारो दो। वह कैसा दिन था देश के खातिर अपना बेटा को भी वलिदान देने को तैयार हो जातेथे जिसके कारण को अंग्रेज को भारत छोडना पडा था। लेकिन आज के नेता देश बिक जाय उसकी परवाह नहीं परन्तु उनके परिवार बेटा भतीजा को गद्दी चाहिए और टाटा विरला जैसा अंबार रूपये होना चाहिए।जिससे सात जन्म आराम से खा सके।आज स्वतंत्रता सेनानियों ऊपर से देखता होगा तो रोकर कहते हो कि बेकार को देश को आजाद कराया? पुण्यतिथि में विचार देने वाले में विपिन कुमार, सेवानिवृत्त शिक्षक मिथलेश सिंह, संजीव कुमार, अरूण कुमार सिंह, सुरेंद्र सिंह, घनश्याम कुमार सुधीर कुमार सिंह, सत्यवान सिंह,साहिल कुमार, अशोक पाण्डे, पप्पू कुमार, अशोक कुमार इंजिनियर, अशोक कुमार,प्रो श्री कांत ठाकुर, अरविंद कुमार, समीर कुमार, सच्चिदानंद मुखिया, अविनाश सिंह, संजय कुमार, सहित दर्जनों उपस्थित थे।
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