कटनी जिले के बड़वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। क्षेत्र की लगभग एक लाख आबादी के लिए यह स्वास्थ्य केंद्र जीवन रेखा के समान है, लेकिन डॉक्टरों, वार्ड बॉय और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी के कारण यह खुद ही वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है। अस्पताल में आवश्यक सुविधाओं का अभाव मरीजों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है, जिसके कारण उन्हें इलाज के लिए मजबूरन जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
बड़वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीकृत 6 डॉक्टरों के पद है वर्तमान में केवल एक डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इतने बड़े क्षेत्र की स्वास्थ्य देखभाल का भार एक डॉक्टर के कंधों पर होने से मरीजों को उचित समय पर और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा मिलना लगभग असंभव हो गया है। इसी प्रकार, वार्ड बॉय और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भी भारी कमी है, जिससे अस्पताल का सुचारू संचालन प्रभावित हो रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक और उदाहरण एम्बुलेंस की कमी है। एक लाख लोगों की आबादी के लिए केवल एक एम्बुलेंस उपलब्ध है, जो आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर 108 एम्बुलेंस सेवा का लाभ दिलाने में भी नाकाफी साबित हो रही है। मरीजों को अक्सर लंबे समय तक एम्बुलेंस का इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी जान को खतरा बना रहता है।
अस्पताल में लाखों रुपये की लागत से आईसीयू वार्ड का निर्माण तो किया गया, लेकिन बिजली की समुचित व्यवस्था न होने के कारण यह आईसीयू वार्ड आज तक चालू नहीं हो सका है और इसे सामान्य वार्ड के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और उदासीनता का जीता-जागता प्रमाण है।
बड़वारा क्षेत्र के लोगों ने कई बार स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग की है, लेकिन उनकी गुहार अनसुनी रही है। स्थिति जस की तस बनी हुई है, जो सरकार द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सिर्फ घोषणाओं और कागजों तक ही सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति बदतर बनी हुई है।