बच्चों की जान को जोखिम में डाल अपनी तिजोरियां भर रहे है माफिया
शहडोल l जिले के बुढार , सिंहपुर एवं खैरहा की सीमा का निर्धारण करने वाले रेत तस्करों के द्वारा अवैध रूप से दिन दहाड़े रेत की चोरी का खेल जारी है, ग्राम धनपुरा , चौराडीह, मझियार, विक्रमपुर, उधिया , नरगी ,सिंहपुर, बोरड़ी, खन्नाथ, बरतरा क्षेत्र में जहां भी रेत दिखी वहीं से रेत माफियाओं ने बेहिचक रेत का उठाव कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो इन्हे स्थानीय पुलिस की खुली छूट मिलने के कारण अवैध रेत का कारोबार करने वालों के हौंसले बुलंद हैं, बेख़ौफी के साथ दिन दहाड़े नालों से रेत निकलना इन माफियाओं का कारोबार बन चुका है ,अगर जिम्मेदार धनपुरा के बैसहा नाले का अवलोकन कर लें तो रेत उठाव से बने गड्ढे साफ बयां कर रहे हैं कि किस तरह रेत माफियाओं द्वारा अवैध तरीके से रेत उठाव कार्य को अंजाम दिया गया है।
रात-दिन भर रहते हैं रेत माफिया सक्रिय, रमाकांत- विपिन- जगदीश की तिकड़ी बनी पुलिस के लिए चुनौती
सूत्रों की माने तो पहले दिन दहाड़े ही रेत का अवैध तरीके से उत्खनन कर परिवहन किया जाता रहा है,ऐसा नहीं है की पुलिस प्रशासन को इन स्थानीय रेत चोर कहे जाने वाले अपराधी प्रवत्ति के माफियाओं के द्वारा की जा रही रेत की तस्करी की जानकारी न हो बल्कि सब कुछ जानते हुए भी इन रेत माफियाओं को पुलिस प्रशासन के जिम्मेदारों द्वारा खुल कर सहयोग किया जाता है इतना ही नही उक्त रेत माफिया आधी रात से सक्रिय हो उठते हैं और समूह बना कर धनपुरा के बैसहा नाला में पूरी व्यवस्था के साथ क्षेत्रों में अपना डेरा जमाते हैं जिनके द्वारा पूरी रात-दिन शराब खोरी की जाती है और आने जाने वाले बाहरी मुसाफिरों के साथ मारपीट वा लूट पाट जैसी घटनाओं को अंजाम देना उनके लिए आम बात हो चली है जिन्हे प्रशासन का खुला संरक्षण मिलने के कारण पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत भी नही कर पाता और इसी के चलते इन रेत कारोबारियों द्वारा हौसला बुलंद रहता हैं पूरी रात , दिन रमाकांत जगदीश विपिन नामक व्यक्ति के द्वारा रेत चोरी करा कर धनपुरा,क्षेत्र में उत्पाद मचाया जाता है।
बच्चों की जान डाल रहे हैं खतरे में
माफिया ट्रैक्टरों के माध्यम से नालों से रेत चोरी का काम कर रहे हैं, स्थानीय गरीब बच्चों की गरीबी का लाभ उठा कर उन्हें इस कार्य में नियोजित किया जाता है , नाले की धारा के बीच से रेत का उठाव कर बच्चों के द्वारा ट्रैक्टरों में भरा जाता है , किसी भी दिन बच्चों के साथ कोई अप्रिय घटना घट सकती है।
तहसील विभाग की भूमिका भी संदिग्ध
तहसील बुढार के क्षेत्र में पड़ने वाले इन स्थानों में कहने को तो पटवारी राजस्व निरीक्षक की पदस्थापना हुई हैं लेकिन राजस्व के अमले की नजर भी इन रेत तस्करों पर नहीं पड़ रही है , यदि सूत्रों की मानें तो सर्कल में पदस्थ तहसीलदार एवं राजस्व पटवारी की मेहरबानी से क्षेत्र में अवैध रेत का कारोबार खुब फल फूल रहा है पदस्थ वन अमला भी मोटे नजराने के एवज में रेत माफियाओं को अभयदान दे रखा है।
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