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गोंड आदिवासी समुदाय ने पूनल सावरी सरहुल महागोंगो आयोजन कर प्राकृतिक नववर्ष किया शुभारम्भ

समाज जागरण अनिल कुमार
हरहुआ वाराणसी।
आज दो दिवसीय गोंड महोत्सव अन्तर्गत दोपहर 3 बजे जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, परिसर वाराणसी के बुड़ादेव पेनठाना पर पूनल सावरी (प्राकृतिक नववर्ष) सरहुल महागोंगो (पूजा) मेला के अवसर पर गोंड महोत्सव का आयोजन अति प्राचीन कोयतुर नौ दिवसीय प्रकृति महापर्व पंडुम चैत्र माह प्रारम्भ के उपलक्ष्य में जनपद के गोंड आदिवासी जनजाति समुदाय के लोगों द्वारा आदिवासी रूढ़ीवादी परम्परा के तहत धूम-धाम से आयोजन किया गया।
दो दिवसीय गोंड महोत्सव के प्रथम दिन सर्व प्रथम गोंडी धर्म के मुठवा पोय भुमका (बैगा) द्वारा प्रकृति शक्ति बड़ादेव एवं खैरो दाई (शीतल दाई) कोईतुर परम्परा की ‘गोटूल’ शिक्षा केन्द्र की महान ज्ञाता एवं प्राकृतिक प्रकोप तथा महामारी को अपनी गुन से मानव-जीवन की पुरातन काल से सदैव रक्षा करने वाली भूरा मरावी तथा कोतमा उईके जी की बारहवीं पुत्री खैरो दाई का सुमिरन कर महागोगो पूजन किया गया। यह पर्व कोईतुर मानव का नववर्ष चैत्र माह उजियारा पाख के प्रथम शुरू के नौ दिनों तक गोंड जनसमुदाय हर्षोल्लास के साथ मनाता है। अपनी अति प्राचीन परम्परागत सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक समृद्धि की परम्परा को बड़ादेव की असीम कामना से सुमिरन करता है क्योंकि जब प्रकृति के प्रतिक वृक्ष अपने पुरातन पत्तों को झाड़कर नये-नये कपोले लेकर नवीन चेतना शक्ति का संचार, नये फसल का आगमन से पावन माह के नौ दिनों में शीतला खैरो दाई एवं ग्राम नार देवता की विशेष आवहंन कर सरहुल प्रकृति पंडुम पर्व गोगों (पूजन) प्रतिवर्ष करते है। साथ ही गोंड समुदाय के लोगों ने प्रण लिया कि जनजाति समुदाय अपने आदिम संस्कृति के रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेगा।
गोंगो पूजन के जनपद के गोंड समुदाय के लोगो ने अपने रूढ़ी परम्परा के तहत प्राचीन समय से चली आ रही पेन पुरखा बुढ़ोदव की पूजन गोंगो में सगाजन के प्रत्येक सदस्य सैकड़ों की संख्या में महिला/पुरुष/बच्चे बच्चियां अपनी इतिहास, धरोहर, संस्कृति, पेन-पुरखा, देव, गोत्र, टोटम की रक्षा एवं संरक्षण के लिए आदिवासी संस्कृति को बचाने व आदिवासी रीति-रिवाज पालन करने का प्रण लिया। साथ ही सभी लोगों ने जय सेवा जय बुढ़ादेव का नारा लगाकर अभिवादन किया।
जिसमें राजेश गोंड, विनोद मरावी, हरगेन यादव, राजदेव यादव, छोटेलाल गोंड, कृष्ण मोहन गोंड, बलिराम गोंड, बुधिराम मरावी, मीना देवी, मनकेसरा देवी सुशील मरावी, बृजेश कुमार, मनभवती देवी, कोमल गोंड, पायल गोंड आदि लोग उपस्थित रहे।


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