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मालदीव में रहते हैं हजारों इंडियन, उनके बगैर क्यों नहीं चल सकता काम, वहां रहने के लिए विवाहित रहना जरूरी

ये कहा जा सकता है कि तल्ख होते रिश्तों के बाद भी मालदीव का काम भारत और भारतीयों के बगैर चल नहीं सकता. एक्सपर्ट भारतीयों की बड़ी संख्या इस देश की मशीनरी को चलाने का काम करती है. टूरिज्म से लेकर हेल्थ केयर सिस्टम में बगैर भारतीयों के वहां कोई भी काम नहीं हो सकता. मालदीव के कई अहम सेक्टर्स को भारतीय एक्सपर्ट संभालते हैं. ये काफी कम्युनिटी के तौर पर वहां रहती है. इसके साथ ये भी जानना चाहिए कि किस तरह से वहां भारतीय टूरिस्ट बढ़ते गए.

मालदीव के सिस्टम को आमतौर पर चलाने का काम विदेश से वहां आए विदेशी एक्सपर्ट्स पर है, जो वहां एक बड़ी कम्युनिटी के तौर पर रहते हैं. इसमें सबसे बड़ी कम्युनिटी भारतीय एक्सपर्ट्स की है.

वर्ष 2022 की जनगणना के मुताबिक मालदीव की कुल आबादी 5.15 लाख है. जिसमें 26 फीसदी विदेशी हैं. इसका मतलब ये भी है कि मालदीव के मूल वाशिंदों की संख्या 382,751 है तो वहां रह रहे विदेशियों की 132,371.

सबसे बड़ी एक्सपर्ट कम्युनिटी भारतीयों की
इसमें विदेशी एक्सपर्ट्स की सबसे बड़ी कम्युनिटी भारतीयों की है, जो फिलहाल वहां 24,000 के आसपास है. ये कम्युनिटी एक्सपर्ट के तौर पर वहां रहती है, ये वहां डॉक्टर, टीचर, अकाउंटेंट, मैनेजर, इंजीनियर, नर्स, टैक्नीशियन और वर्कर्स का काम करती है. आमतौर पर भारतीय एक्सपर्ट्स का ये समुदाय मालदीव की राजधानी माले में रहता है.
इन सभी का मालदीव में सामाजिक मेलजोल भी खूब है. हालांकि इन्हें वहां की नागरिकता नहीं मिल पाती. ये सभी भारतीय नागरिकता पर ही वहां रहते हैं. मालदीव में करीब 400 डॉक्टर्स अपनी सेवाएं देते हैं, इसमें 125 के आसपास भारतीय हैं.


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