अररिया।
राजनीतिक मामलों के जानकार सह सीमांचल के चर्चित युवा सामाजिक कार्यकर्ता कन्हैया कुमार दास ने कहा कि ‘सहारे’ की सरकार में मोदी की गारंटियों का क्या होगा?18वीं लोकसभा की सियासी तस्वीर करीब-करीब साफ हो चुकी है। हालांकि नतीजे चौंकाने वाले रहे, लेकिन भाजपा ने सहयोगियों के साथ सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इस बार बदलाव ये होगा कि मोदी 3.0 सरकार इस बार सहयोगियों की ‘बैसाखियों’ के सहारे चलेगी। वहीं, ‘सहारे’ की सरकार चलाना भाजपा और मोदी के लिए टेढ़ी खीर साबित होने वाला है। क्योंकि मोदी 2.0 में जिन मुद्दों
के सहारे हवा बना भाजपा चुनावों में उतरी थी, मोदी 3.0 में उन्हें सहयोगियों के सहारे जमीन पर उतारना कठिन साबित होने वाला है। इनमें वन इलेक्शन-वन नेशन, यूनिफॉर्म सिविल कोड शामिल हैं, इन्हें भाजपा के संकल्प पत्र और मोदी की गारंटी में शामिल किया गया है। इसके अलावा भाजपा ने परिसीमन का काम चुनावों बाद शुरू करने का वादा किया था। इन मुद्दों को लेकर अब कहा जा रहा है कि इन्हें लागू करने को लेकर आने वाले समय में भाजपा की सहयोगियों के साथ खटपट हो सकती है। भाजपा को इस बार तीसरी बार सत्ता की सीढ़ी तक पहुंचने के लिए सहयोगियों की जरूरत होगी। 272 का जादुई आंकड़ा छूने के लिए इस बार भाजपा को नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू के कंधे की जरूरत पड़ेगी। उनकी बातों को टालना मोदी के सेहत पर पड़ेगी। औकात से बेसी मंत्री पद की मांग, विशेष राज्य का दर्जा सहित कई मुद्दे पर उनकी हामी आसान सी बात नहीं है।
सहारे’ की सरकार में क्या होगा मोदी की गारंटियों का
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