महिलाओं को मिला आत्मसम्मान का दर्जा, दिख रही है कार्य के प्रति निष्ठा
विजय तिवारी
समाज जागरण
अनूपपुर जिले में यातायात प्रभारी के पद पर श्रीमती ज्योति दुबे ने कई महीनो पूर्व कार्यभार संभाला। वे बताती हैं कि शुरूआती दौर में प्रशिक्षण के दौरान ही इन्होने ठान लिया था कि मिलने वाली जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी शिद्दत से करेंगी। मौजूदा समय पर जिले में ट्रैफिक पद पर विराजमान ज्योति दुबे बताती हैं कि महिला व पुरूष के बीच का अंतर सोचों से आता है। अतः परिवार में लड़के तव लड़की का भेद नहीं होना चाहिये। महिलाएं किसी काम में पुरूष से पीछे नहीं है बशर्ते ये आत्मबल से काम लें।
शिक्षा का सफर
ज्योति दुबे जिला दमोह तहसील पथरिया के पास एक गांव की रहने वाली हैं। इनका जन्म किसान परिवार में 08 अगस्त 1990 को हुआ था। इनके दो भाई इनसे छोटे हैं। 5 वीं तक की पढ़ाई इन्होने अपने गांव के सरकारी स्कूल में पूरी की उसके बाद 5 किमी दूर दूसरे गांव में पढाई की। जहां ये पढ़ने जाती थी उसकी दूरी 5 किमी थी। आना-जाना 10 किमी हो जाता था। उसके बाद कालेज की पढ़ाई करने दमोह गई वहां पर इन्होने किराये से कमरा लिया।
सबसे पहले मध्य प्रदेश संदेश उन महिलाओं को सलाम करता है जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से समाज में एक अलग मुकाम बनाया है। हर क्षेत्र में अपना दबदबा बनाती जा रही महिलाओं का लोहा पूरे समाज व पूरे देश ने माना है। आज हम जिले की ऐसी ही महिला के बारे में बात कर रहे हैं जिन्होंने अपनीअं जिद से एक मुक्म्मल जहां हासिल किया है। अपनी इच्छा शक्ति के दम पर हर बार खुद को हजारों को भीड में भी अपने आपको अलग ही साबित किया है कि महिलाएं किसी से काम नहीं है। संवाददाता से अनौपचारिक भेंट में श्रीमती दुबे अपने जीवन की कठिनाईयों को साझा करते हुये उन्होंने जताया कि मेरा फैमिली बैंक ग्राउंड जिस तरह का था जितनी दिक्कते हमने झेली है मेरे अतीत में अगर जायेंगे तो आप कल्पना ही नहीं कर पायेंगे कि ये लडकी यहां तक पहुंच पायेगी। घर की स्थिति भी कोई खास नहीं थी। जब मैं कालेज करने दमोह में आई तो किराये से रहती थी। किराये जो देना रहता था घर से हो नहीं पाता था क्योंकि किसानों की जो आय होती है वो वार्षिक आय होती है। वर्ष में एक बार फसल का जो पैसा आता है बहुत सारे सखर्चे होते हैं उसी में सब खर्च हो जाते थे। दमोह में रहते वक्त में कोचिंग में पढ़ा कर अपने रूम का किराया और अपना खर्चानिकालती थी।
उन्होंने कहा किट्रैफिक पुलिस नाम सुनते ही सख्त अनुशासित व नुकीली मूंछो वाला चेहरा हर इंसान के जेहन में रहता है लेकिन अब यह बात पुरानी हो चुकी है। दमोह निवासी ज्योति दुबे भी छात्र जीवन से प्रशासनिक अफसर बनने का ठान बैठी थीं एसआई की परीक्षा देने के बाद इनका चयन सूबेदार के तौर पर हुआ तो पहले ये हिचकी लेकिन बाद में इन्होंने इसे चुनौती कीतरह लिया और ट्रेनिंग पूरा कियाआत्म बल मेरे साथ था और ईश्वर की कृपा से और मेरे मेहनत और लगन से आज मैं इस मुकाम पर हूं।
कांस्टेबल में हुआ सेलेक्शन
ये बताती हैं कि पढ़ाई के साथ साथ वैकेनसियों की तैयार भी कर रही थी। पढाई में अव्वल होने की वजह से इनका फाईनल बीअर चल ही रहा था इनका कासटेबल में सेलेक्शन हो गया। कांस्टेबल की ट्रेनिंग के समय ही सब इंस्पेक्टर की वैकेंसी आई इन्होने उसका फार्म भरा और सूबेदार में सेलेक्शन हो गया। सूबेदार में इनकी पहली पोस्टिंग पना हुई। इस कैडर में यातो ट्रैफिक प्रभारी बनते हैं या लाईन इंचार्ज बनतेहै।
फील्ड वर्क मन पसंदीदा कार्य
इन्हें जमीनी स्तर पर जुड कर फील्ड वर्क का कार्य करना अच्छा लगता है। सूबेदार में थी तो भी ये ट्रैफिक में थी प्रमोशन के बाद इनकी पहली पोस्टिंग ट्रैफिक में हुई है। इनकी पोस्टिंग पहले सागर हुई थी लेकिन ये संशोधित करवाकर जिला अनूपपुर करवा ली। अनूपपुर जिले में गरिमा पूर्वक अपने पद को संभालते हुये 5 महीने हो गये।
बचपन से देख रहे सपने को किया पूरा
इन्हें शुरू से ही वर्दी वाली जॉब बहुत अच्छी लगती थी। बचपन से ही कसी वर्दीधारी को देखने पर ये उत्साहित होती थी, इन्हें शुरू से ही वर्दी की नौकरी पसंद थी और अपने मन में यही सोचती थी कि एक दिन मैं भी इस मुकाम को हासिल करूंगी। कालेज लाईफ में जब ये सब इंस्पेक्टर मैडम लोगों को आते जाते देखा करती तो और उत्साहित होकर और प्रण कर लेती कि मुझे एक दिन अपने लक्ष्य को पाकर दिखाना है। वर्दी की चाहत इतनी थी कि इनके द्वारा कालेज के समय में एनसीसी ज्वाईन कर लिया गया।
पिता के आंखो में आये आसू
अपने मन की टीस जाहिर करते हुये बताया कि हम लोग का काम ही रहता है चालान बनाना, पन्ना जिलें में एक बार चालानी कार्यवाही के दौरान एक व्यक्ति आया उसने हेलमेट नहीं पहना था उसका 3 सौ रूपये का चालान काटा गया और उससे 3 सौ रूपये ले भी लिये गये। पूरी डिटेल लिखने के बाद सामने वाली की साईन करवानी पड़ती है तो साईन करवाने के लिये जबअंतिम वर्ष की पढाई के वक्त ही इनका सेलेक्शन कांस्टेबल में होने से इनके परिवार में रखुशियों की लहर छा गई। सेलेक्शन के बारे में जब इन्होने अपने पिता से बात की पहले उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था क्योंकि इनके गांव में इससे पहले किसी ने सरकारी नौकरी नहीं की थी। जब सब इंस्पेक्टर की परीक्षा पास कर सूबेदार बनी तो इनके पापा के आंखों में खुशियों के आंसू भर गये।
कार्य के प्रति निष्ठा
जब यातायात प्रभारी ज्योति दुबे से कार्यों के प्रति बात करते हुये पूछा कि आपके डयूटी के समय आप कई तरह के लोगों का सामना करती हैं कुछ गुस्सैल, कुछ सीधे साधे तो आप उनके सामने किसी तरह पेश आती हैं। इस सवाल पर उनका कहना था कि पहले तो में कोशिश करती हूं कि जो लोगों की अपेक्षाएं हैं उस पर पूरी तरह से खरी उतरूं। किसी को किसी प्रकार से हमसे दिक्कत न हो और जो हमारे कार्य हैं उसे बहुत ही ईमानदारी, निष्ठा से करूं कि लोगों को अधिक से अधिक उसका फायदा मिले। कई लोग ऐसे होते है अडियल टाईप के लोग जिनका उद्देश्य की रहता है परेशान करना ऐसे लोगों के सामने मैं उन्ही की तरह पेश आती हूं।
अनूपपुर वासियों को दिया गया संदेश
यातायात नियमों के पालन को लेकर अनूपपुर के सभी निवासियों से अपील करते हुये यातायात प्रभारी ने कहा कि मेरा सभी अनूपपुर वासियों से यही निवेदन है कि ट्रैफिक के नियमों का पालन करे। जब
भी गाडी चलाये तो स्पीड में न चलायें। जितने भी एक्सीडेंट होते है उसका मुख्य कारण ओव्हर स्पीड ही रहता है। यदि नियंत्रित गाडी चलाये तो निश्चित है कि आप रोड पर सुरक्षित रहेंगे। बचाव के लिये हेलमेट लगाये, सीट बेल्ट लगाकर ही गाडी चलायें। गाडी का बीमा जरूर करवाना चाहिये क्योंकि दुर्भाग्यवश घटना घट जाये तो बीमा कंपनी से क्लेम मिल जाता है जिससे सामने वाले को काफी सहायता मिल जाती है। इन सब बातो को बताते हुये यही कहूंगी कि ट्रैफिक के नियमों के प्रति जागरूक हों। ये आपकी सुरक्षा के लिये है। ऐसा भी न करें कि चेकिंग के समय हेलमेट लगा ले आगे बढ़े तो हेलमेट निकाल कर गाड़ी में रख लो ये उचित नहीं है।
जनता की भलाई के लिये
चेकिंग अभियान
चालानी कार्यवाही को लेकर बाते करते हुये प्रभारी द्वारा बताया गया कि हमें एम बी एक्ट की कार्यवाही करनी होती है। पिछले वर्ष की तुलना में हमेशा ज्यादा करनी होती है। उदाहरण के तौर पर पिछले वर्ष अगर 5 हजार के चालान बने तो इस वर्ष 5 हजार 5 सौ रूपये के चालान बनाने ही होते हैं। चेकिंग करना अन्य उद्देश्य से भी जरूरी होता है। यदि चेकिंग नहीं होती तो एक्सीडेंट ज्यादा घटित होते हैं। एक्सीडेंट के बचाव के उपाय लोग नहीं करते हैं। सीट बेल्ट नहीं लगाना, हेलमेट नहीं लगाना।
महिलाओं में हो आत्म बल
महिलाओं की बात करते हुये प्रभारी ने कहा कि सभी महिलाओं में अपने लक्ष्य के प्रति मेहनत और लगन होनी चाहिये। इन्होने महिलाओं एवं जत्राओं के लिये कहा कि सबसे पहले आप सशक्त बनिये, अपने पैरो पर खडे होईये। एक सूत्रीय कार्यक्रम बनाईये कि और अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहिये और निरंतर प्रयास करिये। संभावनाएं बहुत रहती है बस मेहनत और प्रयास की जरूरत होती है तभी आप सफलता प्राप्त कर पायेंगी।
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